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पाकिस्तान में विरोधियों की गिरफ़्तारी

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पाकिस्तान में विरोधियों की गिरफ़्तारी

साथ ही विपक्ष के दसियों कार्यकर्ताओं को गिरफ़्तार भी किया गया है. ये कार्रवाई विपक्षी दलों और वकीलों की प्रस्तावित रैलियों के ऐन पहले की गई है.

पाकिस्तान में विपक्षी दलों और सरकार से नाराज़ वकीलों ने गुरूवार 12 मार्च से विभिन्न शहरों में रैलियाँ कर इस्लामाबाद की ओर कूच करने की घोषणा की हुई है.

पाकिस्तान सरकार का कहना है कि इस्लामाबाद मार्च का उद्देश्य देश में अस्थिरता लाना है.

विपक्ष और वकीलों ने चार दिनों के अपने विरोध की घोषणा पिछले ही महीने की थी जब सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ और उनके भाई के ख़िलाफ़ फ़ैसला सुनाया था.

हरेक पाकिस्तानी को न्यायपालिका की बहाली के लिए खड़ा होना चाहिए. ज़रदारी साहब अपनी बात से मुकर गए हैं और अब हमारे सामने कोई चारा नहीं है नवाज़ शरीफ़

हरेक पाकिस्तानी को न्यायपालिका की बहाली के लिए खड़ा होना चाहिए. ज़रदारी साहब अपनी बात से मुकर गए हैं और अब हमारे सामने कोई चारा नहीं है

अदालत ने नवाज़ शरीफ़ और पंजाब प्रांत के मुख्यमंत्री और उनके भाई शाहबाज़ शरीफ़ के ख़िलाफ़ किसी निर्वाचित पद पर आसीन होने पर पाबंदी लगा दी गई थी.

दोनों नेताओं ने आरोप लगाया था कि इन फ़ैसलों के पीछे राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी का हाथ है जिन्होंने उन्हें अपने रास्ते से हटाने के लिए अपने प्रभाव का इस्तेमाल किया.

विरोधी पूर्व राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के कार्यकाल में बर्ख़ास्त किए गए न्यायाधीशों को अभी तक बहाल नहीं किए जाने के कारण भी नाराज़ हैं.

रोक

विरोधी कार्यकर्ता और वकील इस्लामाबाद जाकर धरना देना चाहते हैं

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने 25 फ़रवरी को शरीफ़ बंधुओं के ख़िलाफ़ फ़ैसला सुनाया था जिसके बाद नवाज़ शरीफ़ की पार्टी - मुस्लिम लीग(नवाज़) - और उनके सहयोगी दलों के साथ-साथ सरकार विरोधी वकीलों ने इस्माबाद मार्च का एलान किया था.

कार्यक्रम के अनुसार विरोधी राजनेता, कार्यकर्ता और वकील विभिन्न शहरों में रैलियाँ और प्रदर्शन करते हुए अंततः इस्लामाबाद पहुँचकर वहाँ अनिश्चितकाल के लिए धरना देंगे.

बुधवार को पाकिस्तान में अधिकारियों ने पंजाब और सिंध प्रांत में रैलियों पर रोक लगाने के साथ-साथ नवाज़ शरीफ़ की पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं को नज़रबंद करने के आदेश जारी किए.

जो सरकार राजनीतिक सभाओं पर पाबंदी लगाती है, वो सरकार कैसे जनरल मुशर्रफ़ के सैनिक सरकार से अलग हो सकती है शाहबाज़ शरीफ़

जो सरकार राजनीतिक सभाओं पर पाबंदी लगाती है, वो सरकार कैसे जनरल मुशर्रफ़ के सैनिक सरकार से अलग हो सकती है

नज़रबंद किए जानेवाले नेताओं में नवाज़ शरीफ़ की पार्टी (पीएमएल-एन) के चेयरमैन राजा ज़फ़र-उल-हक़ के अलावा वरिष्ठ नेताओं अहसन इक़बाल और ग़ुलाम दस्तगीर के नाम शामिल हैं.

अभी ये स्पष्ट नहीं है कि नवाज़ शरीफ़ और शाहबाज़ शरीफ़ को भी नज़रबंद करने के बारे में कोई फ़ैसला हुआ है कि नहीं.

शाहबाज़ शरीफ़ ने पाबंदियों की आलोचना करते हुए कहा है,"जो सरकार राजनीतिक सभाओं पर पाबंदी लगाती है, वो सरकार कैसे जनरल मुशर्रफ़ के सैनिक सरकार से अलग हो सकती है".

दोनों नेताओं को बुधवार को ही उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत के शहर ऐबटाबाद में एक रैली को संबोधित किया.

नवाज़ शरीफ़ ने इस रैली में कहा,"हरेक पाकिस्तानी को न्यायपालिका की बहाली के लिए खड़ा होना चाहिए. ज़रदारी साहब अपनी बात से मुकर गए हैं और अब हमारे सामने कोई चारा नहीं है".

पंजाब से आ रही रिपोर्टों में ये भी कहा जा रहा है कि वहाँ बड़ी संख्या में विपक्षी कार्यकर्ताओं को गिरफ़्तार किया गया है.

साथ ही कई प्रमुख वकीलों और विपक्षी विधायकों के घरों पर छापे भी मारे गए हैं.

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