ओबामा प्रशासन में अमेरिका के साथ संबंध मजबूत होंगे : मेनन (लीड-2)
भारत और अमेरिका के बीच हुए असैन्य परमाणु समझौते को आगे बढ़ाने की दोनों देशों की प्रतिबद्धता के बाद भारत के लिए नई प्रौद्योगिकी के द्वार तो खुलेंगे ही साथ ही अमेरिकी कंपनियों को भी 100 अरब डॉलर का रोजगार मिलेगा।
अमेरिका की यात्रा के दौरान ओबामा प्रशासन के साथ उच्च स्तरीय बातचीत के बाद मेनन ने बुधवार को संवाददाताओं से कहा, "मुझे इस बात का पूरा भरोसा है कि हम ओबामा प्रशासन के साथ आगे बढ़ेंगे।"
भारतीय विदेश सचिव ने अपने तीन दिन के अमेरिकी प्रवास के दौरान विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन, ओबामा के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जनरल जेम्स जोन, राजनीतिक मामलों के अवर मंत्री विलियम बर्न्स और कई अन्य अधिकारियों व सांसदों से मुलाकात की।
मेनन ने इस बात को खारिज कर दिया कि ओबामा प्रशासन भारत की अनदेखी कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस बात का सवाल ही नहीं पैदा होता कि कोई भारत की उपेक्षा करे।
उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ असैन्य परमाणु समझौते के अलावा मौजूदा समय में कृषि और रक्षा समेत 28 अलग-अलग वार्ताएं चल रही हैं जो भारत के विकास के लिए बेहद अहम हैं।
मेनन ने इस बात को खारिज कर दिया कि राष्ट्रपति बराक ओबामा के लिए परमाणु समझौता इतना महत्व नहीं रखता जितना पूर्ववर्ती राष्ट्रपति जार्ज बुश के लिए रखता था। उन्होंने कहा, "असैन्य परमाणु समझौते को दोनों दलों का समर्थन प्राप्त था और वह डेमाक्रेट बहुल कांग्रेस में पारित होने वाला ऐसा समझौता था जिसे रिपब्लिकन प्रशासन ने आगे बढ़ाया था। यही उसकी ताकत है।"
भारत में निवेश कर रही 300 बड़ी अमेरिकी कंपनियों वाली भारत-अमेरिका व्यापार परिषद (यूएसआईबीसी) के प्रमुख सदस्यों ने हाल ही में भारत की यात्रा की थी। इनमें 30 विश्वस्तरीय कंपनियों के 60 वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।
एक बार व्यापार शुरू हो जाने के बाद अमेरिकी कंपनियों के लिए भारत की सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की कंपनियों के साथ साझीदारी का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा। इससे भारत की घरेलू ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।
मुंबई हमले के संदर्भ में पाकिस्तान की ओर से की गई कार्रवाई के बारे में मेनन ने कहा, "यह सकारात्मक प्रगति है लेकिन अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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