औद्योगिक उत्पादन में लगातार दूसरे माह गिरावट (राउंडअप)
वैश्विक वित्तीय संकट के कारण संकटग्रस्त अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के लिए प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा के बावजूद जनवरी माह में देश के औद्योगिक उत्पादन में 0.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
उद्योग मंत्रालय की ओर से गुरुवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक निर्माण सूचकांक में 0.8 फीसदी और खनन सूचकांक में 0.4 फीसदी की गिरावट आई। दूसरी ओर बिजली उत्पादन में 1.8 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
इस ताजा आंकड़े से देश की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) विकास दर सात फीसदी के आसपास रहने के अनुमानों पर सवाल खड़ा हो गया है। चालू वित्त वर्ष के पहले 10 महीनों के दौरान औद्योगिक उत्पाद की दर केवल तीन फीसदी रही।
पिछले 15 वर्षो में पहली बार अक्टूबर में देश के औद्योगिक उत्पादन में गिरावट आई थी। इसके बाद नवंबर में इसमें मामूली सुधार हुआ और यह 1.7 फीसदी रही, लेकिन दिसंबर में सूचकांक में फिर गिरावट आई, जिससे उद्योग जगत चिंतित हो गया।
उधर मुद्रास्फीति की दर 28 फरवरी को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान गिरकर 2.43 फीसदी हो गई, जो इससे पिछले के सप्ताह में 3.03 फीसदी थी। इसके साथ ही मुद्रास्फीति की दर वर्ष 2006 के बाद न्यूनतम स्तर पर पहुंच गई।
उद्योग मंत्रालय की ओर से गुरुवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक मुद्रास्फीति की वर्तमान दर जून 2002 के बाद से यह आंकड़ा सबसे कम है। हालांकि, सप्ताह के दौरान आधिकारिक थोक मूल्य सूचकांक में 0.04 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।
आंकड़ों के मुताबिक प्राथमिक वस्तुओं के सूचकांक में 0.2 फीसदी की बढ़ोतरी हुई जबकि विनिर्मित वस्तुओं के सूचकांक में मामूली 0.1 फीसदी की कमी आई। ईंधन सूचकांक में लगातार दूसरे सप्ताह कोई परिवर्तन नहीं हुआ।
क्रेडिट रेटिंग एजेंसी क्रिसिल लिमिटेड के मुख्य अर्थशास्त्री डी. के. जोशी ने कहा कि मुद्रास्फीति की दर में आगे भी ऐसा रुख जारी रहने की संभावना है और यह संभवत: शून्य के स्तर पर भी आ सकती है।
उद्योग मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों में इस साल तीन जनवरी को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान संशोधित अनुमानों पर आधारित मुद्रास्फीति की दर 5.33 फीसदी रही, जबकि अस्थाई अनुमान में यह 5.24 फीसदी थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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