पाकिस्तान में वकीलों का लांग मार्च आरंभ, रैली स्थल बदलने के प्रस्ताव की अनदेखी (राउंडअप)

कराची और क्वे टा के वकील एक साथ ही निकले और वे लाहौर के अपने साथियों के साथ मिलकर 16 मार्च को संघीय राजधानी में कांस्टीट्यूशन एवेन्यू स्थित संसद भवन के सामने धरना देंगे।

इस दौरान वकीलों ने सरकार के राजधानी में कानून व्यवस्था अप्रभावित रखने के लिए धरना स्थल को संसद के अलावा कहीं अन्यत्र स्थानांतरित करने हेतु संसदीय समिति के गठन के प्रस्ताव को दरकिनार कर दिया।

आतंरिक मामलों के मंत्री रहमान मलिक ने बुधवार को संसद में यह प्रस्ताव रखा था।

सीमा पार वकीलों की अशांति को देखते हुए नई दिल्ली में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने गुरुवार को मंत्रिमंडल की सुरक्षा समिति की बैठक में पाकिस्तान के हालात की समीक्षा की। भारत ने कहा कि आंतकवाद से मुकाबले के लिए पड़ोसी देशों में मजबूत और स्थायी सरकारों की आवश्यकता है।

विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार बैठक में पाकिस्तान की राजनीतिक अस्थिरता की सुरक्षा हालातों पर पड़ने वाले प्रभाव की समीक्षा की गई। बैठक में पाकिस्तान और उत्तर पश्चिम सीमा प्रांत के तालिबान के साथ किए गए समझौतों की भी समीक्षा हुई। इनका भारत की सुरक्षा के लिए गंभीर निहितार्थ है, खासकर पड़ोसी देश से संचालित सीमा पार आतंकवाद को देखते हुए।

बहरहाल पाकिस्तान के विपक्षी राजनीतिक दलों के नेताओं और वकीलों ने कहा कि वे 16 मार्च को इस्लामाबाद पहुंचकर धरना देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

इससे पहले वकीलों ने कराची से जुलूस शुरू कर दिया। इस्लामाबाद में अगले सोमवार को प्रस्तावित धरने से पहले ही 400 से ज्यादा विपक्षी कार्यकर्ता हिरासत में लिए जा चुके हैं।

सिंध उच्च न्यायालय के बाहर बड़ी संख्या में वकील एकत्र हुए। यहीं से जुलूस शुरू हुआ। जियो टीवी के अनुसार वकीलों का जुलूस मजार-ए कायद के लिए रवाना हुआ।

डॉन न्यूज ने खबर दी कि कार्यकर्ताओं को मंगलवार रात और बुधवार को हिरासत में लिया गया जबकि पुलिस ने वकीलों के घरों व कार्यालयों पर छापे मारे।

रिपोर्ट के अनुसार दमन की कार्रवाई शुरू होते ही पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ, पंजाब सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री शाहबाज शरीफ और कुछ अन्य नेताओं को छोड़कर ज्यादातर विपक्षी नेता भूमिगत हो गए हैं।

पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज के कार्यालयों और लाहौर की सड़कों और चौराहों पर लगे शरीफ बंधुओं के बैनर और पोस्टरों को पुलिस तथा प्रशासनिक कर्मी हटा रहे हैं।

पुलिस ने पीएमएल-नवाज के पंजाब सूबे के उपाध्यक्ष मोहम्मद इलियास खान को बुधवार को एक शादी समारोह से हिरासत में ले लिया। डॉन ने शाहबाज के प्रवक्ता ख्वाजा इमरान नाजिर के हवाले से यह खबर दी।

दमनकारी गतिविधियां देर रात तक जारी थीं। सूत्रों के मुताबिक सरकार ने शरीफ बंधुओं को शुक्रवार तक नजरबंद करने का फैसला लिया है। विपक्षी पार्टियों ने आरोप लगाया है कि छापों के दौरान पुलिसकर्मियों ने महिलाओं और बुजुर्गो से बदसलूकी की।

पंजाब में निषेधाज्ञा लगा दी गई है और सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को भीड़ के रूप में एकत्र हो रहे राजनीतिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार करने का निर्देश दिया गया है।

पुलिस उप महानिरीक्षक (ऑपरेशन) अमजद जावेद सलीमी ने कहा है कि पुलिस कानून एवं व्यवस्था की स्थिति बनाए रखेगी और किसी को भी शांति में व्यवधान डालने की इजाजत नहीं दी जाएगी।

प्रांतीय गृह सचिव राव इफ्तिखार ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "आतंकवादी भीड़ और रैलियों का इस्तेमाल अपने नापाक इरादों के लिए कर सकते हैं और तो और वे राजनीतिज्ञों को भी निशाना बना सकते हैं।"

लाहौर उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अनवर कमाल ने कहा है कि वकीलों ने इस्लामाबाद पहुंचने के लिए वैकल्पिक योजनाएं भी बनाई हैं। उन्होंने कहा, "अपने लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों के विरुद्ध धारा 144 लागू किए जाने का विरोध करते हैं। "

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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