पाकिस्तान में आतंकवाद से निपटने के लिए सशक्त सरकार जरूरी: भारत

विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने यहां संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "पाकिस्तान में घटित हो रही घटनाएं उसका आंतरिक मामला है। हम किसी भी संप्रभु देश के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी नहीं करते।"

उन्होंने कहा, "पाकिस्तान एक महत्वपूर्ण पड़ोसी है। मुझे उम्मीद है कि उसके सभी आंतरिक मामले उसके नेताओं द्वारा अपने देश के हित में सौहार्दपूर्ण एवं शांतिपूवर्क ढंग से हल किए जाएंगे।"

वह पाकिस्तान की ताकतवर सेना और राजनीतिक नेतृत्व के बीच तनावपूर्ण संबंधों तथा राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और पूर्व प्रधानमंत्री एवं पाकिस्तान मुस्लिम लीग- नवाज के अध्यक्ष नवाज शरीफ के बीच गतिरोध संबंधी खबरों के बारे में पूछे गए प्रश्नों का उत्तर दे रहे थे। इन घटनाओं के चलते पाकिस्तान में सैनिक विद्रोह संबंधी अफवाहें जोरों पर हैं।

मुखर्जी ने कहा, "हम हमेशा से, विशेषकर अपने पड़ोस में सशक्त और स्थिर सरकारों के हक में रहे हैं ताकि जनता के कल्याण के लिए पूरे क्षेत्र की तरक्की और विकास हो सके।"

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के संदर्भ में यह इसलिए भी प्रासांगिक है ताकि वह उन तत्वों का सफाया कर सकें जो पाकिस्तान और उसके बाहर आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए उसकी धरती का इस्तेमाल करते हैं।

पाकिस्तान में बढ़ती राजनीतिक अस्थिरता तथा पश्चिमोत्तर सीमांत प्रांत में तालिबान से किए गए समझौतों से भारत बहुत चिंतित है, क्योंकि इससे तालिबान के वहां काबिज होने का अंदेशा बढ़ गया है।

मुखर्जी का बयान ऐसे समय में आया है जब मुंबई हमलों की जांच के संदर्भ में पाकिस्तान की ओर से उठाए गए 30 प्रश्नों का जवाब भारत को भेजना है। इससे पाकिस्तान को मुंबई हमलों के सिलसिले में हिरासत में लिए गए छह पाकिस्तानी संदिग्धों के खिलाफ कार्रवाई में मदद मिलेगी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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