सरकारी परियोजनाएं कर रहीं लखनऊ को प्रदूषित

लखनऊ, 10 मार्च (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा स्थापित एक पर्यावरण संस्था के प्रमुख ने कहा कि सरकारी परियोजनाओं के लिए भारी पैमाने पर पत्थर कटाई के कार्य के कारण उत्तर प्रदेश की राजधानी में दमघोंटू स्तर तक बढ़ गए वायु प्रदूषण की ओर से मायावती सरकार ने आंखें बंद कर ली है।

पर्यावरण सुरक्षा और संरक्षण प्राधिकरण (ईपीसीए) के प्रमुख भूरेलाल ने कहा कि हवा में धूल की भारी उपस्थिति से वातावरण दमघोंटू हो गया है। इससे दमा और तपेदिक जैसे फेफड़े से संबंधित रोगों का खतरा और गंभीर हो सकता है।

पूरी राजधानी में चल रही 25 अरब रुपये की परियोजनाओं के लिए पत्थर कटाई का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि लखनऊ में रेस्पिरेटरी सस्पेंडेड पार्टिकुलेट मैटर (आरएसपीएम) की मात्रा अनुमति सीमा से चार गुना अधिक पाई गई है।

लखनऊ दौरे के दौरान भूरेलाल ने आईएएनएस से कहा कि अधिकतम 100 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर के विपरीत लखनऊ में जहां पत्थर कटाई का काम चल रहा है उसके आस पास के स्थानों पर यह 475 माइक्रोग्राम तक पाई गई है।

भूरेलाल ने कहा कि लखनऊ क्लब द्वारा आयोजित एक सेमिनार में उन्होंने यह मुद्दा उठाने के साथ ही शहर की हवा में कार्बन डाईआक्साइड और नाइट्रोजन आक्साइड के बढ़ते स्तर की ओर स्थानीय अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया।

अवकाश प्राप्त आईएएस अधिकारी भूरेलाल को ईमानदारी और प्रतिबद्धता के लिए जाना जाता है, उन्हें लखनऊ और कानपुर में सीएनजी आधारित सार्वजनिक परिवहन सेवा आरंभ कराने के लिए सफल प्रयास कराने का श्रेय भी हासिल है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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