तिब्बत में चीनी दमन 30 वर्षो में सर्वाधिक

dalai lama
बीजिंग/धर्मशाला। तिब्बत में पिछले वर्ष के विरोध प्रदर्शनों के बाद से वहां के लोगों के राजनीतिक, नागरिक और धार्मिक अधिकारों का दमन 1970 के दशक के स्तर पर पहुंच गया है।

इस बीच धर्मशाला में दलाई लामा की दीर्घ आयु और बेहतर स्वास्थ्य के लिए प्रार्थनाएं आरंभ की गईं। तिब्बत में चीनी शासन के खिलाफ विद्रोह आरंभ होने और सर्वोच्च धर्मगुरु दलाई लामा के निर्वासन की 50 वीं वर्षगांठ के एक दिन पहले सोमवार को धर्म गुरु दलाई लामा ने कहा कि तिब्बत के लिए वह लंबे समय तक जिंदा रहने की कोशिश करेंगे।

लंदन स्थित इंटरनेशनल कैम्पेन फॉर तिब्बत की ओर से सोमवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा है कि पिछले वर्ष 10 मार्च को विरोध-प्रदर्शनों का दौर शुरू होने के बाद से तिब्बतियों की अभिव्यक्ति, धर्म और संगठन का दमन ऐसे स्तर तक पहुंच गया है जो माओत्से तुंग की सांस्कृतिक क्रांति (1966 से 76) के बाद से कभी नहीं देखा गया।

रिपोर्ट में कहा गया है कि चीनी सरकार पिछले एक वर्ष से निर्वासित नेता दलाई लामा के खिलाफ दुष्प्रचार कर रही है और साथ ही प्रताड़नाओं, अपहरणों और हत्याओं के अभियान को संरक्षण दे रही है।

रिपोर्ट में पिछले वर्ष तिब्बत की स्वतंत्रता और दलाई लामा के समर्थन में आंदोलन में भाग लेने वाले तिब्बतियों की गिरफ्तारियों और उन्हें दी गई सजा का विवरण भी दिया गया है।

उधर चीन में रहने वाले तिब्बतियों का कहना है कि वे जिंदगी से खुश नहीं हैं क्योंकि वे खुद को पराधीन महसूस करते हैं। रोंगवो बौद्ध मठ के एक तिब्बती बौद्ध का कहना है कि इस वर्ष वे नए साल का उत्सव (लोसार) नहीं मनाने जा रहे हैं। चीन सरकार द्वारा प्रचार के तौर पर हाल में प्रायोजित कराए गए तिब्बत क्षेत्र के दौरों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि वे लोग सच बोलने से डरते हैं, इसी कारण यहां सभी तिब्बती कहते हैं 'सब कुछ ठीक चल रहा है।'

बौद्ध मठ के बाहर तिब्बतियों के निर्वासित धर्म गुरु दलाई लामा की बड़ी तस्वीर टंगी थी। पिछले साल इन्हीं दिनों तिब्बत क्षेत्र में विद्रोह प्रदर्शनों का दौर चला था।

नए साल के संदेश में दलाई लामा ने कहा है कि चीन के दमन की वजह से हजारों तिब्बतियों ने अपनी जिंदगी कुर्बान की है वहीं हजारों लोग अभी भी प्रताड़ना की जिंदगी जी रहे हैं।

उधर पूरे तिब्बती समुदाय को तथा हिमाचल प्रदेश के मैक्लियाडगंज में प्रमुख मंदिर या फिर सुगलाग खांग में लंबी उम्र की प्रार्थना के लिए जमा हुए निर्वासित तिब्बतियों को धन्यवाद देते हुए दलाई लामा ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि वे लंबी उम्र तक जिंदा रहेंगे।

दलाई लामा इस वर्ष 6 जुलाई को 74 वर्ष के हो जाएंगे। उन्होंने अपने अनुयायियों से कहा, "मैं तिब्बत के लिए लंबे समय तक जिंदा रहने की कोशिश करूंगा।"

पिछले एक वर्ष से दलाई लामा के स्वास्थ्य को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। उन्हें चार बार अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। पिछले वर्ष अक्टूबर महीने में पित्ताशय में पथरी के लिए दिल्ली में उनका ऑपरेशन किया गया था।

चीनी शासन के खिलाफ आंदोलन की 50वीं वर्षगांठ के ठीक एक दिन पहले दलाई लामा ने कहा, "हम सभी को तिब्बत में रह रहे तिब्बतियों की कठिनाई पर ध्यान देना चाहिए। हमें उनके प्रति सहानुभूति व्यक्त करनी चाहिए।"

इस बीच धर्मशाला में दलाई लामा की दीर्घ आयु और अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रार्थनाएं आरंभ हो गईं हैं। मैक्लियॉडगंज में दलाई लामा के निवास स्थान के समीप स्थित मुख्य मंदिर में उनके लंबे जीवन के लिए प्रार्थना आयोजित हुई। प्रार्थना में वरिष्ठ निर्वासित नेताओं सहित सैकड़ों की संख्या में तिब्बतियों और भिक्षुओं ने हिस्सा लिया।

प्रार्थना का आयोजन केंद्रीय तिब्बती प्रशासन और तिब्बती समुदाय ने किया। एक वर्ष के भीतर यह दूसरा मौका है जब दलाई लामा के दीर्घ जीवन के लिए प्रार्थना आयोजित की गई है। जुलाई में उनके 73 वें जन्मदिन के अवसर पर भी एक ऐसी ही प्रार्थना आयोजित की गई थी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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