दलाई लामा को तिब्बत मसले के जल्द समाधान की उम्मीद (लीड-1)
10 मार्च 1959 को शुरू किए गए असफल तिब्बती आंदोलन की 50वीं वर्षगांठ पर सुगलाग खांग यानी मुख्य मंदिर परिसर में सैकड़ों तिब्बतियों को संबोधित करते हुए दलाई लामा ने कहा, "हम चीनी जनता के खिलाफ नहीं हैं। यद्यपि चीनी नेताओं ने हमारा भरोसा खो दिया है लेकिन चीनी जनता में हमारा पूर्ण विश्वास है। शांतिप्रिय तिब्बतियों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया जा रहा है।"
दलाई लामा ने कहा, "मैं हमेशा कहता हूं कि हमें सर्वश्रेष्ठ की उम्मीद रखनी चाहिए और बुरी स्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए। चाहे हम इसे वैश्विक संदर्भ में देखें या चीन में घट रही घटनाओं के संदर्भ में, दानों स्थितियों में तिब्बत मसले के जल्द समाधान के लिए उम्मीद के पर्याप्त कारण हैं।"
दलाई लामा ने आगे कहा, "लेकिन यदि किन्हीं कारणों से तिब्बत का आंदोलन लंबा खिंचता है तो हमें इसके लिए भी तैयार रहना चाहिए।"
बाद में मीडिया के साथ बातचीत में दलाई लामा ने बताया कि तिब्बत मसले के समाधान के प्रति उन्हें इतना भरोसा क्यों है।
दलाई लामा ने कहा, "पहली बात तो यह कि तिब्बती लोगों में वर्तमान में बहुत उत्साह है। चीनी शासन के 50 से 60 साल हो चुके हैं और तिब्बतियों की पूरी एक नई पीढ़ी आ चुकी है, लेकिन चीनियों की प्रताड़ना से उनका उत्साह कम नहीं हुआ है।"
तिब्बती धर्म गुरु ने कहा, "दूसरी बात यह है कि अब ढेर सारे चीनी, तिब्बत के मसले को स्वीकारते हैं। चीन को महाशक्ति बनने के लिए दुनिया के बाकी हिस्सों से उसे सम्मान की जरूरत है।"
तिब्बत से अपने पलायन के मुद्दे पर दलाई लामा ने कहा, "मैं बिल्कुल ऐसा नहीं समझता कि वह गलत निर्णय था। मैं लगातार पिछले 50 वर्षो के अनुभवों की ओर मुड़ कर देखता हूं। मैं हमेशा महसूस करता हूं कि यह एक सही निर्णय रहा।"
लामा ने कहा, "यदि चीन 17 सूत्रीय समझौते पर बरकरार रहा होता तो 1959 का संकट नहीं पैदा हुआ होता।"
दलाई लामा ने चीनी राष्ट्रपति हू जिंताओ से निवेदन किया कि चीन और तिब्बत में एक शांतिमय समाज की स्थापना के लिए वैज्ञानिक तरीके अपनाए जाएं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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