तिब्बत छोड़ने का निर्णय सही था : दलाई लामा

धर्मशाला, 10 मार्च (आईएएनएस)। अपने हजारों तिब्बती अनुयायियों के साथ पिछले पचास वर्षो से निर्वासन का जीवन बिता रहे तिब्बती धर्मगुरु, 14वें दलाई लामा ने मंगलवार को कहा कि मार्च 1959 में उनका तिब्बत छोड़ना एक सही निर्णय था।

10 मार्च 1959 को शुरू किए गए असफल तिब्बती आंदोलन की 50वीं वर्षगांठ पर सुगलाग खांग यानी मुख्य मंदिर परिसर में मीडिया को संबोधित करते हुए दलाई लामा ने कहा कि उन्हें कभी ऐसा नहीं लगा कि उनका निर्णय गलत था।

लामा ने कहा, "मैं बिल्कुल ऐसा नहीं समझता कि वह गलत निर्णय था। मैं लगातार पिछले 50 वर्षो के अनुभवों की ओर मुड़ कर देखता हूं। मैं हमेशा महसूस करता हूं कि यह एक सही निर्णय रहा।"

उन्होंने कहा, "तिब्बत के समर्थन में तमाम मीडिया को देख कर मैं खुश हूं।"

लामा ने कहा, "यदि चीन 17 सूत्रीय समझौते पर कासम रहा होता तो 1959 का संकट नहीं पैदा हुआ होता।"

दलाई लामा ने चीनी राष्ट्रपति हू जिंताओ से अनुरोध किया कि चीन और तिब्बत में एक शांतिमय समाज की स्थापना के लिए वैज्ञानिक तरीके अपनाए जाएं।

तिब्बती धर्मगुरु ने कहा, "मैं पहले भी कह चुका हूं कि चीनी नेताओं में मेरा भरोसा बहुत कम है, लेकिन चीनी जनता पर मेरा पूर्ण विश्वास है। हम तिब्बती लोग चीनी लोगों के खिलाफ नहीं हैं।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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