'भारत-पाकिस्तान में अविश्वास बढ़ा'

मुशर्रफ़ ने सोमवार को कराची में पत्रकारों से कहा, "मेरे समय में दोनों देश विवादों को दूर करने के काफ़ी नज़दीक पहुँच गए थे, लेकिन मुंबई हमलों के बाद दोनों देशों को बीच अविश्वास बहुत बढ़ गया है."
उनका कहना था, "दोनों मुल्क़ों की सरकारों को कोशिश करनी चाहिए कि शांति वार्ता फिर शुरु हो. इसके लिए ज़रुरी है कि दोनों देशों के आवाम एक दूसरे के नज़दीक आएँ."
मुशर्रफ़ ने चेतावनी देते हुए कहा, "दोनों देशों में बयान आते हैं कि जंग हो सकती है, हमें लड़ाई की बतों को बंद करना चाहिए और विवाद सुलझाने के लिए आगे बढ़ना चाहिए."
उन्होंने माना कि हाल के दिनों में भारत के लोगों में पाकिस्तान के प्रति कई तरह की ग़लत धारणाएँ बनी हैं जिन्हें दूर करने की ज़रूरत है.
'बदनाम पाकिस्तान'
परवेज़ मुशर्रफ़ ने पाकिस्तान की आंतरिक स्थिति को दुखद बताते हुए चरमपंथ, राजनीतिक संकट और आर्थिक संकट से तुरंत निपटने पर ज़ोर दिया.
ये ख़बर भी ग़लत नहीं है कि सूबा सरहद में चरमपंथी बैठे हुए हैं. ये अल क़ायदा के लोग हैं, अरब हैं, उज़्बेक हैं, यहाँ तक कि चीन से आए हुए हैं और हमारे लिए मुसीबत खड़ी कर रहे हैं परवेज़ मुशर्रफ़
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उन्होंने देश में बढ़ती चरमपंथी गतिविधियों पर चेतावनी देते हुए कहा, "हमारी पूरी दुनिया में बदनामी हो रही है. दूसरे देश हमारी फ़ौज के बारे में टिप्पणियाँ कर रहे हैं. हमें इस दुनिया में रहना है कि नहीं."
उन्होंने पाकिस्तान की ज़मीन पर विदेशी मिसाइल हमलों की आलोचना की लेकिन ये भी कहा, "ये ख़बर भी ग़लत नहीं है कि सूबा सरहद में चरमपंथी बैठे हुए हैं. ये अल क़ायदा के लोग हैं, अरब हैं, उज़्बेक हैं, यहाँ तक कि चीन से आए हुए हैं और हमारे लिए मुसीबत खड़ी कर रहे हैं."
मुशर्रफ़ ने इनके ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की ज़रूरत बताते हुए कहा, 'हमें इन लोगों को मार डालना चाहिए'.
परवेज़ मुशर्रफ़ ने राजनीतिक दलों पर सेना को बदनाम करने और उसे नीचा दिखाने का आरोप लगाया.
पूर्व राष्ट्रपति और सेना प्रमुख ने ज़ोर देकर कहा कि देश मुश्किल दौर से गुजर रहा है और सेना अहम मुद्दों पर चुप नहीं रह सकती है.


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