हवाई मार्ग से बाघिन पहुंची पन्ना राष्ट्रीय उद्यान
भोपाल, 9 मार्च (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश में बाघिन को हवाई मार्ग से कान्हा राष्ट्रीय उद्यान से पन्ना राष्ट्रीय उद्यान ले जाने का अभियान सोमवार को पूरा हो गया। प्रदेश के लिए यह पहला मौका है जब किसी बाघिन को हवाई रास्ते से स्थानांतरित किया गया है।
इस तरह पन्ना राष्ट्रीय उद्यान में एक सप्ताह के भीतर दो बाघिनों ने दस्तक देकर बाघों की संख्या बढ़ाने के अभियान का श्रीगणेष कर दिया है।
टाइगर स्टेट के रूप में दुनिया में अपनी पहचान रखने वाले मध्य प्रदेश में ही बाघ संकट में है। आलम यह है कि पन्ना राष्ट्रीय उद्यान में बाघों का नजर आना ही कम हो चुका है। इसी को ध्यान में रखकर रीलोकेशन योजना बनाई गई। जिसके तहत दो बाघिनों को पन्ना लाया गया है। बांधवगढ़ से बाघिन सड़क मार्ग से पन्ना पहुंची थी और अब दूसरी बाघिन हवाई मार्ग से पन्ना लाई गई है।
कान्हा राष्ट्रीय उद्यान से पन्ना ले जाई गई बाघिन रविवार को वन्य प्राणी दस्ते के कब्जे में नहीं आ पाई थी। सोमवार की सुबह फिर बाघिन को खोजने का काम शुरू हुआ और वन्य प्राणी विशेषज्ञों के दस्ते ने हाथियों पर सवार होकर बाघिन को किसली क्षेत्र में खोज निकाला।
कान्हा राष्ट्रीय उद्यान के क्षेत्र संचालक आर.पी. सिंह के मुताबिक बाघिन को निश्चेतक बंदूक से बेहोश किया गया। उसके बाद बाघिन के शरीर की नाप जोख हुई और उसे रेडियोकॉलर पहनाया गया। बाघिन को पिंजरे में रखकर वायुसेना के हेलीकाप्टर एम़ आई़ 17 के भीतर पहुंचाया गया। हेलीकाप्टर ने सुबह 10.30 बजे कान्हा से उड़ान भरी और वह दोपहर 12.45 बजे पन्ना पहुंच गया।
पन्ना राष्ट्रीय उद्यान से मिली जानकारी के अनुसार बाघिन को निर्धारित बाड़े में छोड़ दिया गया है। बाघिन पूरी तरह स्वस्थ्य है। उस पर नजर रखने के लिए क्लोज सर्किट कैमरे लगाए गए हैं। आने वाले तीन दिन तक बाघिन इसी बाड़े में रहेगी और उसके बाद उसे मुक्त रूप से विचरण करने के लिए राष्ट्रीय उद्यान में छोड़ दिया जाएगा।
कान्हा से लाई गई बाघिन का उस वंश से नाता है जिसमें मादाओं ने हमेशा शावकों के बड़े समूह को जन्म दिया है। वन्य प्राणी विशेषज्ञों को उम्मीद है कि इस बाघिन के जरिए पन्ना राष्ट्रीय उद्यान में बाघों की संख्या में इजाफा होगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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