मतभेदों को समझदारी से सुलझाएं भारत-पाक : मुशर्रफ (लीड-1)
नई दिल्ली में आयोजित एक संगोष्ठी में हिस्सा लेकर लौटे मुशर्रफ ने सोमवार को यहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए भारत और पाकिस्तान से अपील की कि वे अपने मतभेदों को समझदारी के साथ सुलझाएं और युद्धोन्माद भड़काने से बचें।
अगस्त 2008 में पद छोड़ने के बाद अपने पहले पूर्ण संवाददाता सम्मेलन में मुशर्रफ ने कहा, "युद्धोन्माद नकारात्मक है, क्योंकि यह दोनों देशों की जनता के बीच मतभेद पैदा करता है। लोग चाहते हैं कि आपसी बातचीत और शांति प्रकिया बहाल की जाए।"
पाकिस्तान के अशांत पश्चिमोत्तर क्षेत्र में विदेशी आतंकियों की उपस्थिति स्वीकार करते हुए मुशर्रफ ने कहा कि इस मुद्दे के साथ प्राथमिकता के आधार पर निपटा जाना चाहिए।
मुशर्रफ ने कहा, "जनजातीय इलाकों में विदेशी आतंकी बैठे हुए हैं। चाहे आप उन्हें अलकायदा कह लें, उज्बेक कह लें या फिर चीनी। हमें उन्हें हर हाल में अपने क्षेत्र से निकालना होगा।"
पूर्व राष्ट्रपति ने कहा, "सरकार को उनके खिलाफ कार्रवाई करनी होगी। यह कार्रवाई पाकिस्तान को करनी है, न कि विदेशी एजेंसियों को।"
मुशर्रफ ने देश के अशांत पश्चिमोत्तर हिस्से स्वात घाटी तथा अन्य छह जिलों में शरीयत कानून लागू करने को लेकर एक मौलाना के साथ पाकिस्तान सरकार के समझौते का समर्थन किया।
मुशर्रफ ने कहा, "उस इलाके में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए थे। आखिर वे क्या चाहते थे? वे अपेक्षाकृत जल्द न्याय चाहते थे। न्याय ही शांति लाएगा।"
मुशर्रफ ने कहा, "लोग जल्द न्याय चाहते हैं, लेकिन उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के कारण ऐसा संभव नहीं है। अब इन अपीलों की सुनवाई फेडरल शरीयत कोर्ट करेगा।"
मुशर्रफ ने कहा कि उत्तर पश्चिम सीमांत प्रांत (एनडब्ल्यूएफपी) के सात जिलों में शरीयत कानून लागू करने की पहल उनके राष्ट्रपति काल में शुरू की गई थी।
मुशर्रफ ने कहा, "यह मांग मेरे शासन काल में उठाई गई थी। हमने इस पर बातचीत शुरू की थी।"
अमेरिका और अन्य पश्चिमी सरकारों ने इस समझौते की यह कहते हुए लगातार आलोचना की है कि यह तालिबान के आगे झुकने जैसा है। लेकिन मुशर्रफ इससे सहमत नहीं हैं।
वह कहते हैं, "मैं सोचता हूं कि हम कुछ तालिबानी तत्वों के साथ काम कर सकते हैं। यदि इससे शांति बहाल होती है तो उन्हें एक मौका क्यों नहीं दिया जाना चाहिए?"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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