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दूरबीन करेगी दूसरी पृथ्वी की खोज

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दूरबीन करेगी दूसरी पृथ्वी की खोज

'द केप्लर' दूरबीन सूर्य के चक्कर लगाएगा और अंतरिक्ष के ऐसे हिस्सों पर ग़ौर करेगा जिसमें माना जाता है कि पृथ्वी जैसे एक लाख ग्रह मौजूद हैं.

वैज्ञानिकों ने शनिवार को अपनी तरह का ऐसा पहला प्रक्षेपण किया है.

केप्लर को केप कैनावरल एयर फ़ोर्स स्टेशन से डेल्टा-II रॉकेट के ज़रिए प्रक्षेपित किया गया.

नासा में संयुक्त प्रबंधक डॉ एडवर्ड वीलर ने कहा, "यह सिर्फ़ एक वैज्ञानिक ही नहीं बल्कि एक ऐतिहासिक मिशन है."

उन्होंने कहा, "यह मानव के कुछ ऐसे मूल प्रश्नों के उत्तर देगा जो हज़ारों साल से हमारे मन में घुमड़ते रहे हैं, जब पहली बार लोगों ने आसमान की ओर देखते हुए सवाल किया होगा, क्या हम अकेले हैं?"

पानी से जीवन

अंतरिक्ष में छोड़े गए अब तक के सबसे बड़े कैमरे से लैस यह ऐसा पहला मिशन है जिसे सूर्य जैसे तारों के चक्कर काटती हुई पथरीली दुनिया की खोज के लिए डिज़ाइन किया गया है.

बृहस्पति के आकार के उपग्रह को उसके ग्रह के सामने से गुज़रते वक़्त पहचानना ठीक उसी तरह है जो किसी कार की हेडलाइट के सामने से गुज़रते मच्छर के लिए किया जाए. और पृथ्वी के आकार के ग्रह को खोजने की कोशिश भी इसी हेडलाइट में एक छोटे से कीट को तलाशने के समान है जेम्स फ़ेनसन

बृहस्पति के आकार के उपग्रह को उसके ग्रह के सामने से गुज़रते वक़्त पहचानना ठीक उसी तरह है जो किसी कार की हेडलाइट के सामने से गुज़रते मच्छर के लिए किया जाए. और पृथ्वी के आकार के ग्रह को खोजने की कोशिश भी इसी हेडलाइट में एक छोटे से कीट को तलाशने के समान है

वैज्ञानिकों का मानना है कि हो सकता है कि जीवन की संभावना वाले गर्म क्षेत्र में स्थित ग्रहों की सतह पर पानी मौजूद हो. और जहाँ पानी हो, वहाँ कम से कम जीवन की संभावना तो होगी ही.

हमारे सौर मंडल के अलावा अब तक 300 से ज़्यादा ग्रहों की खोज की जा चुकी है जो पृथ्वी से काफ़ी मिलते-जुलते हैं लेकिन इनमें से पृथ्वी की तरह के द्रव्यमान वाला कोई नहीं है.

इनमें से ज़्यादातर बृहस्पति की तरह गैस के पिंड या प्लूटो की तरह बर्फ़ के बने हुए हैं.

हमारी आकाशगंगा में पृथ्वी जैसे ग्रहों का न मिलने की मुख्य वजह यह नहीं है कि ऐसे ग्रह नहीं हैं, बल्कि कई वैज्ञानिक मानते हैं कि इसकी बड़ी वजह दूरबीनों की तकनीकी कमज़ोरी है.

अब केप्लर इन ग्रहों के गुज़रने के वक़्त प्रकाश के मद्धिम पड़ने के ज़रिए इन्हें खोज निकालेगा.

हेडलाइट और मच्छर

कुछ सौर मंडल इस तरह से बने हैं कि उनके अपने ग्रह सूर्य के सामने से गुज़रते हैं जैसा कि पृथ्वी के नज़रिए से देखा गया है. ऐसे वक़्त में ग्रह अपने उपग्रह के प्रकाश को कुछ कम कर देते हैं.

ऐसे में चक्कर काट रही दूरबीन इसकी चमक में आ रहे बदलावों को नोट कर लेगी.

हमारी नज़र बड़ी संख्या में छोटे-बड़े नक्षत्रों पर रहेगी जहाँ गर्म रहने के लिए ग्रह सूर्य से भी ज़्यादा बड़े और गर्म अपने तारे के चारो ओर चक्कर काट रहे होंगे विलियम बोरुक़ी

हमारी नज़र बड़ी संख्या में छोटे-बड़े नक्षत्रों पर रहेगी जहाँ गर्म रहने के लिए ग्रह सूर्य से भी ज़्यादा बड़े और गर्म अपने तारे के चारो ओर चक्कर काट रहे होंगे

केलीफ़ोर्निया में नासा की जेट प्रयोगशाला के केप्लर प्रोजेक्ट मैनेजर जेम्स फ़ेनसन ने कहा, "अगर केप्लर पृथ्वी पर रात के वक्त एक छोटे से कस्बे को देखे तो यह वहाँ की बल्ब के सामने से किसी व्यक्ति के गुज़रने पर उसके धीमे होते प्रकाश को भी पहचानने में सक्षम है."

उन्होंने कहा, "बृहस्पति के आकार के ग्रह को उसके सूर्य के सामने से गुज़रते वक्त पहचानना ठीक उसी तरह है जैसे कार की हेडलाइट के सामने से गुज़रता मच्छर, और पृथ्वी के आकार के ग्रह को खोजने की कोशिश भी हेडलाइट की रोशनी में एक कीड़े को देखने के समान है."

कैलिफ़ोर्निया स्थित नासा के एमेस रिसर्च सेंटर के केप्लर चीफ़ साइंटिस्ट विलियम बोरुक़ी ने कहा, "हमारी नज़र बड़ी संख्या में छोटे-बड़े नक्षत्रों पर रहेगी जहाँ गर्म रहने के लिए ग्रह सूर्य से भी ज़्यादा बड़े और गर्म अपने सूर्यों के चारो ओर चक्कर काट रहे होंगे."

ज़ाहिर है, यह एक जटिल और लंबी प्रक्रिया है जिसमें काफ़ी समय लग सकता है लेकिन वैज्ञानिक इससे काफ़ी उम्मीदें लगाए बैठे हैं.

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