बीजेडी और बीजेपी का गठबंधन टूटा

नवीन पटनायक ने गठबंधन टूटने की घोषणा करते हुए कहा है कि बीजेडी चाहती थी कि चुनाव जीतने की संभावना के आधार पर सीटों का फ़ैसला हो लेकिन बीजेपी इसके लिए तैयार नहीं थी.
इसके बाद यह लगभग तय दिखता है कि राज्य में दोनों दल अलग-अलग चुनाव लडेंगे.
हालांकि बीजेपी ने बीजेडी के इस फ़ैसले को अभी स्वीकार नहीं कर रही है और उसके प्रवक्ता सिद्धार्थ नाथ का कहना है कि रविवार को केंद्रीय पदाधिकारी इस मामले में उचित निर्णय लेंगे.
बीबीसी के भारत संपादक संजीव श्रीवास्तव का कहना है कि बीजेपी के प्रवक्ता चाहें जो कहें लेकिन बीजेपी के नेताओं से हुई बातचीत से यह साफ़ महसूस हो रहा है कि अब बीजेपी के लिए मंच पर पर्दा गिर चुका है.
गठबंधन टूटा
बीजेडी और बीजेपी उड़ीसा गठबंधन उड़ीसा में सत्तारूढ़ सरकार में भी साथ था और इस गठबंधन ने दो कार्यकाल पूरे कर लिए हैं.
वहाँ इस समय लोकसभा चुनाव के साथ-साथ विधानसभा के भी चुनाव होने हैं.
पिछले साल ईसाइयों पर हुए हमलों के बाद बीजेपी और बीजेडी के बीच तनाव दिखने लगा था
इन दोनों ही चुनावों के लिए बीजेडी और बीजेपी के बीच सीटों के बँटवारे पर चर्चा हो रही थी.
अब तक दोनों दलों के बीच 4:3 यानी चार अनुपात तीन के हिसाब से सीटों का बँटवारा होता रहा है. इसका मतलब है कि बीजेडी की चार सीटों पर बीजेपी को तीन सीटें.
लेकिन अब यह फ़ार्मूला बीजेडी को मंज़ूर नहीं है.
बीजेडी नेता और मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने कहा है कि पिछले कुछ समय में बीजेडी का जनाधार बढ़ा है और बीजेपी का जनाधार कम हुआ है, ऐसे में पुराने फ़ार्मूले के आधार पर सीटों का बँटवारा संभव नहीं है.
भुवनेश्वर से स्थानीय पत्रकार संदीप साहू का कहना है कि बीजेपी को विधानसभा के लिए तो बीजेडी को ज़्यादा सीटें देना मंज़ूर था लेकिन वो लोकसभा पर कोई समझौता नहीं करना चाहती.
लेकिन यह बीजेडी को स्वीकार्य नहीं है.
इस गठबंधन का टूटना ग्यारह साल पुराने गठबंधन एनडीए के लिए बुरी ख़बर है, ख़ासकर ऐसे समय में जब वह केंद्र में सत्ता हासिल करने की कोशिशों में लगी हुई है.
पिछले विधानसभा चुनाव में 147 सीटों वाली उड़ीसा विधान सभा में भाजपा-बीजेडी गठबंधन ने 93 सीटों पर जीत हासिल कर बहुमत हासिल किया था.
बीजेडी को 61 और बीजेपी को 32 सीटों पर जीत मिली थी.


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