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नीलामी पर माल्‍या-सरकार में मतभेद

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Vijay Mallya
न्‍यूयॉर्क। राष्‍ट्रपिता महात्‍मा गांधी के सामान की नीलामी को लेकर भारत सरकार और उद्योगपति विजय माल्‍या के बीच मतभेद पैदा हो गये हैं।

एक तरफ जहां सरकार यह दावा कर रही है कि उसने विजय माल्‍या के माध्‍यम से बापू का सामान खरीदा, वहीं इस बात पर विजय माल्‍या ने कहा है कि सरकार गलत तर्क दे रही है। माल्‍या का कहना है कि सरकार और उनके बीच नीलामी को लेकर कोई ऐसी बात नहीं हुई।

ज्ञात हो कि बापू का सामान विजय माल्‍या द्वारा खरीदे जाने के बाद सांस्‍कृतिक मामलों की मंत्री अंबिका सोनी ने कहा था कि भारत सरकार ने विजय माल्‍या के माध्‍यम से ही सामान खरीदा है।

उन्‍होंने कहा कि नीलामी के समय भारतीय उच्‍चायोग के अधिकारी विजय माल्‍या के प्रतिनिधियों के संपर्क में थे। यही नहीं अंबिका सोनी का कहना है कि चूंकि दिल्‍ली हाई कोर्ट द्वारा नीलामी पर रोक लगाये जाने के बाद भारत सरकार उसमें शामिल नहीं हो सकती थी, इसलिए विजय माल्‍या का सहारा लिया।

अंबिका सोनी की इस बात को यूबी ग्रुप के चेयरमैन विजय माल्‍या ने सिरे से खारिज कर दिया है। माल्‍या ने कहा कि गांधी जी की चीजों को खरीदने के लिए सरकार ने उनसे संपर्क नहीं किया था। माल्‍या का कहना है कि उन्होंने राष्ट्रपिता की चीजों को नीलामी में अपने बूते खरीदा है।

सरकार का इसमें कोई योगदान नहीं है। इसके अलावा माल्‍या ने यह भी कहा कि वो बापू की वस्‍तुआं को सरकार को जरूर सौंपना चाहते हैं।

गौरतलब है कि माल्‍या ने गुरुवार को महात्मा गांधी का एक चश्मा, जेब घड़ी, एक जोड़ी चमड़े की चप्पलें, एक पीतल की थाली और कटोरी की सबसे ऊंची बोली लगाकर खरीद लिया। इसके अलावा कुछ समय पहले माल्‍या ने नीलामी में ही टीपू सुल्तान की तलवार भी खरीदी थी।

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