ज्यादा दाम पर नीलाम होनी चाहिए थी बापू की बेशकीमती विरासत: ओटिस

वाशिंगटन, 7 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिकी संग्राहक जेम्स ओटिस को खुशी है कि गांधी की निशानियां भारत लौट रही हैं लेकिन उन्हें लगता है कि वंचितों के कल्याण की खातिर यह बेशकीमती खजाना कम से कम एक करोड़ डॉलर में नीलाम होना चाहिए था।

ओटिस ने आईएएनएस को न्यूयार्क से फोन पर बताया, "मुझे खुशी है कि ये वस्तुएं भारत लौट रही हैं लेकिन मुझे इस बात का थोड़ा दुख भी है कि इनके बहुत कम दाम मिले। गांधी की धरोहर बेशकीमती है। अहिंसा को बढ़ावा देने के लिए ये निशानियां सत्तर-अस्सी लाख से एक करोड़ डॉलर में नीलाम होनी चाहिए थीं।"

जहां तक नीलाम हुई वस्तुओं का सवाल है। यह फैसला अमेरिका सरकार को करना है कि ये भारत सरकार को मिलेंगी या खरीददार को। उन्होंने कहा कि भारत सरकार की तरह लोग भी कानूनी दावा पेश कर सकते हैं।

ओटिस ने कहा कि वे इससे इंकार नहीं कर रहे हैं क्योंकि उन्होंने नीलामी करने वाली संस्था के साथ कानूनी करार किया है। ओटिस ने बताया कि ऐन मौके पर वे नीलामी रुकवाने गए थे लेकिन एंटीकोरम ऑक्शनीयर्स इसके लिए राजी नहीं हुआ।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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