प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री का चुनाव सीधे जनता करे : शिवराज
इंडिया टुडे कांक्लेव को संबोधित करते हुए चौहान ने लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं के चुनाव भी एक साथ कराने की वकालत की। उन्होंने कहा कि इससे विकास के लिए अधिक समय मिल सकेगा। इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण और जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
चौहान ने कहा कि चुनाव का खर्च सरकार वहन करे इससे चुनाव के लिए चंदे के नाम पर होने वाली गड़बड़ी को रोका जा सकेगा। सभी राजनीतिक दल हमेशा चुनाव की तैयारी में व्यस्त रहते हैं। इससे विकास की गति अवरूद्ध होती है। चुनाव के कारण सभी दल एक-दूसरे पर छींटाकशी करते हैं जिससे जनता में गलत संदेश जाता है।
चौहान ने राज्यों के विकास के लिए स्वायत्तता को आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि राज्यों को अपनी विकास योजनाएं बनाने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्रता होनी चाहिए। राज्यों को इतना कमजोर नहीं किया जाना चाहिए कि वह केन्द्र पर निर्भर रहें। सभी राज्य सरकारों को एकसमान सहायता दी जाए।
केन्द्र सरकार पर राज्यों के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि राज्यों के विकास और जनता की भलाई के कार्यो में राजनीति नहीं होनी चाहिए। जहां राज्यों को समृद्घि और विकास के लिए अधिक स्वायत्तता की जरूरत है वहीं केन्द्र का मजबूत होना भी आवश्यक है। संघीय ढांचे को मजबूत बनाये रखने के लिए यह आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि केन्द्र द्वारा विरोधी दलों की राज्य सरकारों को सहायता देने में भेदभाव और पक्षपात नहीं किया जाना चाहिए। अनेक राज्यों को गठबंधन के दल के कारण विशेष पैकेज दिया जाता है जबकि कई राज्यों को जरूरत होने के बाद भी विशेष पैकेज नहंीं दिया जाता।
चौहान ने इस मौके पर आज के परिप्रेक्ष्य में राज्यपाल के पद की आवश्यकता पर पुनर्विचार किये जाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विभिन्न पदों की शपथ दिलाये जाने के लिए उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश उपयुक्त हो सकते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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