अब जैविक गुलाल से खेलिए होली

बहुराष्ट्रीय कंपनी आर्गेनिक इंडिया ने हर्बल गुलाल से एक कदम आगे बढ़ते हुए बाजार में इस जैविक गुलाल को उतारा है। यह गुलाल तुलसी और हल्दी के वृक्षों से बनाया गया है।

लखनऊ स्थित राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (एनबीआरआई) के वैज्ञानिक सी.वी.राव ने आईएएनएस को बताया कि आदिकाल से भारत में तुलसी और हल्दी का औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है। होली पर बाजार में रासायनिक रंगों की भरमार रहती है। ये रंग हमारी त्वचा के लिए हानिकारक होते हैं। ऐसे में जैविक गुलाल रासायनिक रंगों से बचने के बेहतर विकल्प हैं।

इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हर्बल मेडिसीन में प्राध्यापक एन.सिंह ने बताया कि जैविक गुलाल बनाने के लिए जिन औषधीय पौधों का इस्तेमाल किया गया है, उन्हें जैविक उर्वरकों के जरिए उगाया गया है। इस वजह से त्वचा पर इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता।

आर्गेनिक इंडिया के एक विशेषज्ञ ने बताया कि जैविक गुलाल हरे और पीले, दो रंगों में बनाए गए हैं। हरा गुलाल तुलसी की पत्तियों से और पीला गुलाल हल्दी से बनाया बनाया गया है। ये गुलाल लखनऊ के कई रिटेल स्टोरों में उपलब्ध हैं।

लखनऊ विश्वविद्यालय के बायोकेमेस्ट्री विभाग में प्राध्यापक यू.एन.द्विवेदी ने कहा कि जैविक गुलाल न सिर्फ त्वचा के लिए कंडीशनर का काम करता है, बल्कि इसके प्रयोग से त्वचा पर दाने भी नहीं निकलते।

महत्वपूर्ण है कि लखनऊ स्थित भारतीय विष विज्ञान संस्थान ने इसी सप्ताह एक अध्ययन में पाया कि बाजार में मिलने वाले गुलाल में हानिकारक क्रोमियम, निकिल और लेड जैसे तत्व मौजूद हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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