68 प्रतिशत कामकाजी महिलाएं जीवनशैली रोगों से ग्रस्त : एसोचैम

इस बात का खुलासा महिला दिवस (8 मार्च) के मौके पर एसोसिएटेड चेंबर ऑफ कामर्स (एसोचैम) द्वारा कराए गए एक सर्वेक्षण में हुआ है। शनिवार को जारी इस रिपोर्ट में कहा गया है कि 21 से 52 वर्ष उम्र वर्ग की महिलाओं को इस सर्वे में शामिल किया गया। पाया गया कि 68 प्रतिशत महिलाएं जीवनशैली जनित रोगों से ग्रस्त हैं।

'प्रीवेंटिव हेल्थकेयर एंड कॉरपोरेट फीमेल वर्कफोर्स' शीर्षक वाले अध्ययन में कहा गया है कि भारत के शहरी क्षेत्रों में 27 प्रतिशत महिलाएं नौकरी पेशा हैं, लिहाजा उनकी स्वास्थ्य समस्याएं समाज व व्यापार दोनों के लिए चिंता का विषय हैं।

अध्ययन में कहा गया है कि लंबे समय तक तथा समय सीमा की बंदिशों के तहत काम करने की मजबूरी के कारण 75 प्रतिशत कामकाजी महिलाएं अवसाद या सामान्य चिंता की बीमारी से ग्रस्त हो जाती हैं।

काम और समय सीमा के दबाव के कारण 53 प्रतिशत ऐसी कामकाजी महिलाएं खाना नहीं खा पातीं और वे जंक फूड पर निर्भर हो जाती हैं।

मीडिया, ज्ञान प्रक्रिया आउटसोर्सिग और यात्रा संबंधी क्षेत्रों से जुड़ी महिलाएं, रोजगार असुरक्षा की भावना के कारण बीमारी हालत में भी छुट्टियां नहीं ले पातीं और मजबूरन काम करती रहती हैं। वर्तमान वित्तीय संकट के माहौल में यह स्थिति और बदतर हो गई है।

अध्ययन के लिए नमूने के रूप में शामिल 29 प्रतिशत महिलाएं प्रति वर्ष अपने स्वास्थ्य पर 5,000 से 50,000 रुपये तक खर्च करती हैं। ये महिलाएं उच्च या निम्न रक्तचाप, मधुमेह, हृदय रोग, अस्थमा, मूत्र रोग या अर्थराइटिस से ग्रस्त हो जाती हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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