सांसद बनने की हसरत में अदालत का दरवाजा खटाखटा रहे हैं कई बाहुबली
इन सभी के रास्ते में एकमात्र बाधा 1951 के जनप्रतिनिधि कानून की धारा 8(3) है जिसके मुताबिक किसी भी अपराध में दोषी ठहराया गया और दो साल से ज्यादा के कारावास की सजा प्राप्त व्यक्ति सजा पूरी होने के छह साल बाद तक चुनाव नहीं लड़ सकता।
आतंकवाद निरोधक अदालत या फिर किसी उच्च न्यायालय द्वारा सजा सुनाए जाने की सूरत में लोकसभा में दाखिल होने के रास्ते की इस इकलौती बाधा को दूर करने का तरीका उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाना हो सकता है।
कानून के जानकारों के अनुसार राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद राजीव रंजन उर्फ पप्पू यादव, मोहम्मद शहाबुद्दीन, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुखराम, लोक जनशक्ति पार्टी के सांसद सूरज भान और जनता दल (युनाइटेड) के पूर्व सांसद आनंद मोहन अपनी नैय्या पार लगाने के लिए अदालत में गुहार लगा सकते हैं।
समाजवादी पार्टी में हाल में शामिल होने वाले संजय दत्त ने कुछ ही दिनों पहले सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा था। वह लखनऊ से चुनाव लड़ना चाहते हैं और उन्होंने पूर्व क्रिकेटर और राजनीतिज्ञ नवजोत सिंह सिद्धू के मामले का हवाला देते हुए न्यायालय से 1993 के मुंबई बम कांड में अपने खिलाफ सुनाए गए फैसले को छह वर्ष तक स्थगित करने का अनुरोध किया है।
गैर इरादतन हत्या के एक मामले में दोषी ठहराए गए सिद्धू वर्ष 2007 में सर्वोच्च न्यायालय की शरण में गए थे। न्यायालय ने सिद्धू के खिलाफ सुनाए गए फैसले को स्थगित करने का आदेश दिया था, जिसकी बदौलत वे अमृतसर उपचुनाव में हिस्सा ले सके थे।
दत्त की याचिका दाखिल होने से महज एक ही दिन पहले सर्वोच्च न्यायालय ने अंडरवर्ल्ड डॉन बबलू श्रीवास्तव की ऐसी ही याचिका खारिज कर दी थी। लेकिन दत्त और अन्य लोगों के साथ भी ऐसा ही होगा, यह जरूरी नहीं।
पप्पू यादव को वामपंथी नेता अजित सरकार की हत्या के सिलसिले से आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। शहाबुद्दीन को हत्या सहित कई मामलों में दोषी ठहराया जा चुका है। आनंद मोहन को बिहार के गोपालगंज जिले के जिलाधिकारी जी. कृष्णय्या की हत्या करने वाली भीड़ को उकसाने का दोषी ठहराते हुए पटना उच्च न्यायालय ने उसको आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। सूरज सिंह को एक किसान की हत्या का दोषी ठहराया गया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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