आम नागरिकों के मारे जाने की निंदा

आम नागरिकों के मारे जाने की निंदा

संयुक्त राष्ट्र महासचिव का कहना है कि एलटीटीई और सरकारी सेना के बीच जारी लड़ाई के दौरान बड़ी संख्या में बच्चे मारे गए हैं. इसके अलावा हज़ारों आम नागरिक अभी भी इन इलाक़ों में फँसे हुए हैं.

गुरुवार को श्रीलंका की सरकार ने कहा था कि वो आम नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए दो नए रास्ते खोलने की अनुमति देने की योजना बना रही है.

लेकिन कोलंबो स्थित बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि सरकार अपनी इस योजना की जानकारी फँसे लोगों को कैसे देगी और क्या एलटीटीई विद्रोही इसके लिए तैयार होंगे?

दूसरी ओर संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून लड़ाई के दौरान बड़ी संख्या में आम नागरिकों के मारे जाने से काफ़ी चिंतित हैं.

अपील

एक बयान जारी करके उन्होंने दोनों पक्षों से लड़ाई रोकने की अपील की है ताकि उस इलाक़े में फँसे लोगों को सुरक्षित निकाला जा सके.

बान की मून ने एलटीटीई से अपील की है

राहत संस्थाओं ने भी पूर्वोत्तर श्रीलंका में बड़े मानवीय संकट की चेतावनी दी है. बान की मून ने अपने बयान में कहा है कि पूर्वोत्तर श्रीलंका में लड़ाई रोकने की तुरंत आवश्यकता है ताकि आम नागरिकों की जान बचाई जा सके.

आकलन ये है कि पूर्वोत्तर श्रीलंका में लड़ाई के कारण 70 हज़ार से दो लाख आम नागरिक फँसे हुए हैं. राहत एजेंसियों का दावा है कि बड़ी संख्या में आम नागरिक मारे गए हैं और घायल भी हुए हैं.

दोनों पक्ष इससे इनकार करते हैं कि आम नागरिकों की मौत के लिए वे ज़िम्मेदार हैं. बान की मून ने एलटीटीई से यह भी अपील की कि वह नागरिक क्षेत्रों से हथियारों और अपने लड़ाकों को हटा ले.

उन्होंने यह भी अपील की कि एलटीटीई मानवीय सहायता कार्यों में मदद करे और संगठन में बच्चों की भर्ती तुरंत बंद करे.

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