'झड़प के लिए वकीलों का रवैया ज़िम्मेदार'

न्यायमूर्ति श्रीकृष्णा ने इस घटना की आगे जाँच करने में असमर्थता व्यक्त करते हुए सुप्रीम कोर्ट को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी.
चेन्नई में 26 फ़रवरी को हुई झड़प में अनेक वकील घायल हुए थे और अब भी आंदोलन कर रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने इसकी जाँच का काम न्यायमूर्ति श्रीकृष्णा को सौंपा था.
न्यायमूर्ति श्रीकृष्णा ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पुलिस ने भी लाठीचार्ज के दौरान वकीलों के साथ ज़्यादती की थी.
रिपोर्ट में सिफ़ारिश की गई है कि वकीलों के व्यवहार से संबंधित कुछ दिशानिर्देश बनाए जाने चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को 19 फ़रवरी की घटना की जाँच के लिए हाईकोर्ट के किसी न्यायाधीश को नियुक्त करने की वकीलों की माँग ठुकरा दी है.
वकीलों ने भी इस विवाद के समाधान के लिए सुप्रीम कोर्ट के तीन वरिष्ठ वकीलों के परसरन, एफ़एस नरीमन और केके वेणुगोपाल से बातचीत के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है.
इस अजीबोगरीब स्थिति को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने श्रीकृष्णा जाँच रिपोर्ट तमिलनाडु सरकार और मद्रास हाईकोर्ट को भेजने का आदेश दिया है.
हिंसक झड़प
हाईकोर्ट की तीन सदस्यीय खंडपीठ पहले से ही सारे मामले की सुनवाई कर रही है.
उधर, मद्रास हाईकोर्ट के हड़ताली वकीलों की माँग है कि चेन्नई के पुलिस आयुक्त को हटाया जाए.
चेन्नई में स्थित हाईकोर्ट परिसर में 19 फ़रवरी को वकीलों और पुलिस के बीच हुई हिंसक झड़पों में कई लोग घायल हो गए थे.
हिंसक झड़पें उस समय शुरू हो गई थीं जब पुलिस जनता पार्टी नेता सुब्रमण्यम स्वामी पर हमला करने वाले वकीलों को गिरफ़्तार करने हाईकोर्ट परिसर में पहुँची थी.
सुब्रमण्यम स्वामी हाईकोर्ट में जब किसी मामले की पैरवी करने पहुँचे थे तो वकीलों ने उनपर हमला कर दिया था.
वकील एलटीटीई के विरोध में दिए गए स्वामी के बयान का विरोध कर रहे थे.


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