'आर्थिक संकट की मार महिलाओं पर ज़्यादा'

'महिलाओं के लिए वैश्विक रोज़ग़ार रुझान' की एक ताज़ा रिपोर्ट में आईएलओ ने चेतावनी दी कि मंदी ने अमीर देशों के लोगों को पहले प्रभावित किया है फिर भी विकासशील देशों की महिला कामगार मंदी की मार से बच नहीं सकतीं.
संगठन का कहना है कि वैश्विक आर्थिक संकट का प्रभाव सबसे पहले दुनिया के अमीर देशों के वित्तीय क्षेत्र की पुरुष प्रधान नौकरियों पर पड़ा.
लेकिन अब आर्थिक संकट इन क्षेत्रों के अलावा भी व्यापक रूप से फैल रहा है.
इस रिपोर्ट के लेखक जेफ़ जॉनसन कहते हैं, "वित्त, बीमा, रियल एस्टेट जैसे क्षेत्र में आमतौर पर पुरुष ज़्यादा काम करते हैं. लेकिन संकट बढ़ने के साथ-साथ अर्थव्यवस्था के दूसरे सेवा क्षेत्रों पर भी असर पड़ा जो उद्योग ज़्यादातर महिला प्रधान होते हैं."
कम होती नौकरियाँ
आईएलओ ख़ासतौर पर विकासशील देशों में कृषि क्षेत्र या घरों में दिहाड़ी के आधार पर काम करने वाली महिलाओं की स्थिति को लेकर चिंतित है.
उनके पास ख़ुद को बचाने के लिए कोई श्रम या सामाजिक सुरक्षा नहीं होती और वे ज़्यादा असुरक्षित होती हैं.
आईएलओ का आकलन है कि इस साल दुनिया में पाँच करोड़ से भी ज़्यादा लोग बेरोज़गार हो सकते हैं जिनमें से दो करोड़ 20 लाख महिलाएँ होंगी.
आईएलओ ने सरकारों से अपील की है कि वे आर्थिक पैकेज के तहत लोगों के लिए नई नौकरियों का इंतज़ाम करें, जिनमें उचित वेतन और सामाजिक सुरक्षा के उपाय भी सुनिश्चित किए जाएँ.


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