'माल्या नहीं सरकार ने खरीदा बापू का सामान'

अंबिका सोनी ने मीडिया से बातचीत में कहा है कि कल रात नीलाम हुई बापू की सभी वस्तुएं भारत सरकार ने खरीदी हैं और इसके लिए व्यावसायी व यूबी ग्रुप के मालिक विजय माल्या की मदद ली गई है।
सांस्कृतिक मामलों की मंत्री का कहना है कि दिल्ली हाई कोर्ट ने नीलामी पर रोक लगा दी थी, इसलिए भारत सरकार खुद नीलामी का हिस्सा नहीं बन सकती थी। यही कारण है कि सरकार को विजय माल्या की मदद लेनी पड़ी।
अंबिका सोनी का कहना है कि नीलामी के दौरान भारत सरकार अमेरिका स्थित भारतीय दूतावास के जरिए पूरे समय विजय माल्या के प्रतिनिधियों के संपर्क में थी। इस दौरान स्वंय विजय माल्या भी सरकार के संपर्क में थे। इसी तरह हम बापू का सामान भारत ला सके।
भारत के पास अभी भी मौका
अगर कानूनी दांवपेंच पर नजर डालं तो भारत के पास अभी भी बापू का सामान बिना पैसा दिये यहां लाने का मौका है। यही नहीं विजय माल्या द्वारा दी गई रकम भी वापस हो सकती है।
अधिकारियों के मुताबिक भारत सरकार जल्द ही नीलामी के आयोजकों के खिलाफ मुकदमा करने जा रही है। वो इसलिए क्योंकि यूएस स्टेट जस्टिस डिपार्टमेंट ने गुरुवार को सवाल उठाया है कि आखिर दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा लगायी गई रोक को क्यों नहीं माना गया। भारत सरकार के पास इस मामले को हल करने के लिए दो हफ्ते का समय है, क्योंकि एंटीकोरम ऑक्शनर्स दो सप्ताह बाद बापू का सामान विजय माल्या को सौंप देंगे।
गौरतलब है कि न्यूयॉर्क के 'एंटीकोरम ऑक्शनर्स" ने गांधीजी की ऐतिहासिक चप्पलों, थाली, कटोरा, घड़ी और उनके चश्मों की कल रात नीलामी आयोजित करवाई थी, जिसमें विजय माल्या के प्रतिनिधियों ने सबसे ऊंची बोली (करीब 9 करोड़ रुपए) लगाकर उन्हें खरीद लिया। अब जल्द ही इन वस्तुएं के भारत आने की उम्मीद है। ये सभी वस्तुएं एक अमेरिकी नागरिक जेम्स ओटिस के पास थीं।


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