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गांधी की वस्तुओं की नीलामी की तैयारी,

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न्यूयार्क/नई दिल्ली, 6 मार्च (आईएएनएस)। महत्मा गांधी की कुछ निजी वस्तुओं को नीलाम करने के लिए निश्चित किए गए समय से कुछ घंटे पहले न्यूयार्क के नीलामी घर ने कहा कि नई दिल्ली द्वारा इन वस्तुओं के संग्रहकर्ता की शर्तो को खारिज कर दिए जाने के बाद वह नीलामी की तैयारी कर रहा है। वहीं दूसरी ओर भारत सरकार ने कहा कि वह इन ऐतिहासिक वस्तुओं को हासिल करने के लिए हर संभव कोशिश करेगी।

मैनहटन के नीलामी घर 'एंटीक्योरम ऑक्सनीर्स' के प्रवक्ता ने नीलामी से चार घंटे पहले आईएएनएस से फोन पर हालांकि भारतीय अधिकारियों के साथ जारी बातचीत पर कुछ भी कहने से इंकार कर दिया।

उधर, समाचार पत्र न्यूयार्क टाइम्स में छपी रिपोर्ट में भारतीय अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि नीलामी अवैध है, हालांकि उन्होंने (भारतीय अधिकारियों) यह भी कहा वे संभावित समझौते के लिए संग्रहकर्ता से बातचीत करते रहेंगे।

इस बीच न्यूयार्क में भारतीय महावाणिज्यिक दूत प्रभु दयाल ने न्यूयार्क टाइम्स से कहा कि भारत सरकार नीलामी में बोली नहीं लगाएगी क्योंकि यह अदालत की अवमानना होगी। अखबार ने कहा कि है अभी नीलामी की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

न्यूयार्क की नीलामी संस्था एंटीकोरम ऑक्शनर्स के माध्यम से भारतीय समयानुसार गुरुवार रात 1.30 बजे गांधी की जिन धरोहरों की नीलामी की जानी है कि उनमें घड़ी, चश्मा, चप्पलें, कटोरा और तश्तरी हैं। इन वस्तुओं की बोली के लिए सुरक्षित राशि 20,000 से 30,000 डॉलर रखी गई है।

इस बीच भारतीय महावाणिज्यिक दूत प्रभु दयाल ने गुरुवार सुबह एक बार फिर इस वस्तुओं के संग्रहकर्ता जेम्स ओटिस से मुलाकात की।

इस बारे में समाचार पत्र न्यूयार्क टाइम्स ने कहा है कि ओटिस काफी सकारात्मक हैं और उन्होंने आशा जताई कि दोनों पक्ष नीलामी से पहले किसी समझौते पर पहुंच जाएंगे। हालांकि दयाल ने कहा कि इस माहौल में कोई भी अर्थपूर्ण चर्चा संभव नहीं है।

उन्होंने कहा, "हम इस मामले में काफी खुले दिमाग है।" हालांकि उन्होंने कहा कि ओटिस की जो मांग है उस पर सहमत होने का अधिकार उनके पास नहीं है।

ओटिस और उनके सहयोगी लेस्टर कुर्ट्ज, जो जार्ज मैसन विश्वविद्यालय में प्रोफेसर है, ने कहा कि गुरुवार को उन्होंने भारतीय अधिकारियों के साथ दो घंटे का समय बिताया।

ओटिस ने कहा कि बातचीत के दौरान एक समय चर्चा गर्मागर्म हो गई थी। उन्होंने कहा कि हालांकि दोनों पक्ष नीलामी के वक्त तक किसी संभावित समझौते पर पहुंच जाएंगे।

ओटिस ने बुधवार को न्यूयार्क में दयाल से मुलाकात के बाद कहा था कि वह गांधी की धरोहरों की नीलामी नहीं कराएंगे, बशर्ते भारत सरकार गरीबों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च बढ़ाए या फिर अहिंसा के सिद्धांत के प्रसार के मकसद से चलाए जाने वाले शैक्षणिक समारोहों के लिए वित्तीय मदद मुहैया कराए।

दयाल ने बताया, "हमने उनसे कहा था कि यदि वह इन्हें दान में देना नहीं चाहते तो हम भारत सरकार की ओर से इन वस्तुओं को खरीदने को तैयार हैं।"

दूसरी तरफ अमेरिका में भारतीय मूल के होटल व्यवसायी संत सिंह चटवाल की अगुवाई में अनिवासी भारतीय होटल व्यवसायियों के एक समूह की भी भारत सरकार की ओर से नीलामी में हिस्सा लेने की है।

वाणिज्य दूतावास ने कहा है कि उसने न्यूयार्क की नीलामी संस्था 'एंटीक्योरम ऑक्शनर्स' से दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश का सम्मान करने को कहा है जिसमें अदालत ने महत्मा गांधी के वैधानिक वारिस नवजीवन ट्रस्ट की याचिका पर नीलामी रोकने को कहा है।

उधर, संस्कृति मंत्री अंबिका सोनी ने नई दिल्ली कहा,"हमें महात्मा गांधी से संबंधित वस्तुओं को हासिल करना होगा और हम इसके लिए सभी उपायों पर विचार कर रहे हैं। आवश्यकता पड़ने पर हम नीलामी में भी हिस्सा लेंगे, जो इन वस्तुओं को स्वदेश लाने का अंतिम विकल्प होगा।"

सोनी का यह बयान विदेश राज्यमंत्री आनंद शर्मा के उस बयान के बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि गांधी की धरोहरों को हासिल करने के लिए सरकार कोई समझौता नहीं करेगी और न ही कोई शर्त मंजूर करेगी। उन्होंने अमेरिकी संग्रहकर्ता जेम्स ओटिस से इन वस्तुओं को नीलामी से बाहर रखने की अपील की थी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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