नीलामी रुकवाने के लिए ओटिस की नई शर्ते

gandhi sandle
वाशिंगटन, 5 मार्च: महात्मा गांधी की धरोहरों की नीलामी रोकने के लिए अमेरिकी संग्राहक जेम्स ओटिस की ओर से नई शर्ते रखे जाने के साथ ही भारतीय राजनयिकों ने नीलामी रुकवाने के प्रयास तेज कर दिए हैं।

इससे पहले बुधवार रात न्यूयार्क स्थित भारतीय महावाणिज्य दूत प्रभु दयाल को भेजे पत्र में ओटिस ने नीलामी रोकने के लिए दो नई शर्ते रखीं। पहली शर्त में उन्होंने कहा है कि भारत सरकार अपने रक्षा खर्च से ध्यान हटाकर गरीबों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च को बढ़ाए।

अपनी दूसरी शर्त में ओटिस ने कहा है कि 78 देशों में महात्मा गांधी के अहिंसा सिद्धांत को बढ़ावा देने के मकसद से चलाए जाने वाले शैक्षणिक समारोहों के लिए वित्तीय मदद मुहैया कराए। उन्होंने कहा कि है कि इन दोनों शर्तो में से अगर भारत एक पर अमल करने पर सहमत होता है तो नीलामी रोकी जा सकती है।

उन्होंने पत्र में कहा है, "हम आपके जवाब की और गुरुवार को आपके साथ कुछ समझौतों या प्रस्तावों पर विस्तार से बातचीत के प्रति आशावान हैं।" ओटिस ने दयाल से बुधवार सुबह मुलाकात की थी और गुरुवार को नीलामी से पहले दोनों की फिर मुलाकात होगी।

उधर, दयाल ने कहा है कि उन्होंने न्यूयार्क में नीलामी करने वाली संस्था से कहा है कि वह नीलामी रोकने संबंधी दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश का सम्मान करे। उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश को लेकर वे न्यूयार्क अदालत से भी संपर्क साधेंगे।

अमेरिका में भारतीय मूल के होटल व्यवसायी संत सिंह चटवाल की अगुवाई में एक समूह की भारत सरकार की ओर से गांधी जी की धरोहरों की नीलामी में हिस्सा लेने की भी योजना है।

जिन धरोहरों की नीलामी की जानी है कि उनमें घड़ी, चश्मा, सैंडल, कटोरा और तश्तरी हैं। इन वस्तुओं की बोली के लिए रिजर्व प्राइज 20,000 से 30,000 डॉलर रखा गया है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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