ओटिस की कोई शर्त नहीं मानेगा भारत

प्रस्तावित नीलामी से महज 12 घंटे पहले शर्मा ने एक टेलीविजन चैनल से बातचीत में कहा, "हम जेम्स ओटिस से अपील करते हैं कि वे इन वस्तुओं को नीलामी से हटा ले।"
न्यूयार्क की नीलामी संस्था एंटीकोरम ऑक्शनर्स के माध्यम से गांधीजी की जिन धरोहरों की नीलामी की जानी है कि उनमें घड़ी, चश्मा, सैंडल, कटोरा और तश्तरी हैं। इन वस्तुओं की बोली के लिए रिजर्व प्राइज 20,000 से 30,000 डॉलर रखा गया है।
शर्मा ने कहा, "हम स्पष्ट कर चुके हैं कि गांधी की वस्तुएं हमारी राष्ट्रीय धरोहर हैं और इसलिए हमारी साझी धरोहर हैं। हम इनकी हिफाजत के लिए कर्तव्यबद्ध है।"
इस बीच भारतीय राजनयिक न्यूयार्क में भारतीय समय के अनुसार देर रात 1.30 बजे होने वाली इस नीलामी को रुकवाने की जी-जान से कोशिश कर रहे हैं।
इससे पहले बुधवार को ओटिस ने कहा था कि वह गांधी की धरोहरों की नीलामी नहीं कराएंगे यदि भारत सरकार गरीबों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च बढ़ाए या फिर महात्मा गांधी के अहिंसा सिद्धांत के 78 देशों में प्रसार करने के मकसद से चलाए जाने वाले शैक्षणिक समारोहों के लिए वित्तीय मदद मुहैया कराए।
शर्मा ने कहा कि भारत गांवों में रहने वाले गरीबों और उनकी शिक्षा से जुड़े प्रमुख नीतिगत फैसले लेता रहा है। न्यूयार्क में भारतीय महावाणिज्य दूत प्रभु दयाल ने बताया, "हमने उन्हें कहा था कि यदि वे इन्हें दान में नहीं चाहें तो हम उन्हें भारत सरकार की ओर से खरीदने को तैयार हैं।"
अमेरिका में भारतीय मूल के होटल व्यवसायी संत सिंह चटवाल की अगुवाई में अनिवासी भारतीय होटल व्यवसायियों के एक समूह की भी भारत सरकार की ओर से इस नीलामी में हिस्सा लेने की योजना है।
चटवाल के अनुसार, इसका मकसद यही है कि कोई और उन्हें खरीद नहीं पाए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपिता की वस्तुएं कोई भारतीय खरीदे और उन्हें भारत भिजवाए।
न्यूयार्क में वाणिज्य दूतावास की दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा इस नीलामी पर लगाए गई रोक के संबंध में स्थानीय अदालत से संपर्क करने की भी योजना है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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