भारतीय खरीदेंगे गांधीजी का निजी सामान

gandhi spects

भारतीय मूल के अमरीकी महात्मा गांधी की निजी वस्तुओं को नीलामी में ख़रीदकर भारत को सौंपने के लिए आगे आए हैं. इधर भारत सरकार भी सक्रिय है.दूसरी ओर भारत सरकार ने भी इन्हें भारत लाने के प्रयास तेज़ कर दिए हैं.

अमरीका में होटल कारोबार से जुड़े संत सिंह चटवाल ने भारतीय मीडिया से बातचीत में कहा कि वो कुछ अन्य भारतीय अमरीकियों के साथ मिलकर गांधीजी की वस्तुओं को नीलामी में ख़रीदने का प्रयास करेंगे.

उनका कहना था,'' हमारा मकसद महात्मा गांधी की निजी वस्तुओं को हासिल कर उन्हें वापस भारत लाना है. हम जो भी संभव होगा उसे करने का प्रयास करेंगे.''

हमारा मकसद महात्मा गांधी की निजी वस्तुओं को हासिल कर उन्हें वापस भारत लाना है. हम जो भी संभव होगा उसे करने का प्रयास करेंगे संत चटवाल, भारतीय मूल के अमरीकी उद्योगपति

हमारा मकसद महात्मा गांधी की निजी वस्तुओं को हासिल कर उन्हें वापस भारत लाना है. हम जो भी संभव होगा उसे करने का प्रयास करेंगे

उल्लेखनीय है कि न्यूयॉर्क में गुरुवार को एक नीलामी में महात्मा गांधी की निजी वस्तुएँ नीलाम होने जा रही हैं.

भारतीय विदेश मंत्रालय ने अमरीका में अपने प्रतिनिधियों से कहा है कि वे महात्मा गांधी की निजी वस्तुओं को देश के लिए हासिल करने की हरसंभव कोशिश करें.

न्यूयॉर्क का एंटीक़ोरम ऑक्शनीयर्स गांधीजी की पहचान वाले गोल फ़्रेम वाले चश्मे, एक जोड़ी चमड़े की चप्पलें, एक जेब घड़ी, पीतल के एक प्याले और थाली की एक साथ नीलाम करने जा रहा है.

सरकार भी सक्रिय

भारत के विदेश राज्यमंत्री आनंद शर्मा ने कहा है कि भारत की आज़ादी के 'हीरो' की निजी वस्तुओं को हासिल करने के लिए नीलामी में बोली लगाने समेत हरसंभव क़दम उठाए जाएंगे.

भारत की आज़ादी के 'हीरो' की निजी वस्तुओं को हासिल करने के लिए नीलामी में बोली लगाने समेत हरसंभव क़दम उठाए जाएंगे आनंद शर्मा, विदेश राज्यमंत्री

भारत की आज़ादी के 'हीरो' की निजी वस्तुओं को हासिल करने के लिए नीलामी में बोली लगाने समेत हरसंभव क़दम उठाए जाएंगे

इस नीलामी के पीछे, गांधीजी की निजी वस्तुओं को जमा करने वाले अमरीकी नागरिक का कहना है कि वे गांधीजी की ये चीज़ें भारत सरकार को देने को तैयार हैं, बशर्ते सरकार ग़रीबों की ज़्यादा मदद करने को तैयार हो.

गांधी की नीलाम होने वाली वस्तुओं के मालिक जेम्स ओटिस ने कहा कि वो गांधीजी की वस्तुएं भारत सरकार को देने को तैयार हैं.

लेकिन उन्होंने ये शर्त रखी है कि भारत सरकार ग़रीबों पर ख़र्च की जाने वाली राशि को कुल राष्ट्रीय उत्पाद के एक प्रतिशत से बढ़ा कर पांच प्रतिशत कर दे. न्यूयॉर्क का एंटीक़ोरम ऑक्शनीयर्स के प्रतिनिधि का कहना है कि उनकी शुरूआती बोली 20 से 30 हज़ार अमरीकी डॉलर होगी.

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