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'चीन के लिए सबसे कठिन साल'

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दुनियाभर में जारी आर्थिक संकट से चीन भी अछूता नहीं है. संसद को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ ने माना है कि चीन पर इसकी मार पड़ी है.संसद को संबोधित करते हुए उन्होंने घोषणा की कि देश की अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने के लिए 585 अरब डॉलर का निवेश कार्यक्रम शुरू होगा.

उन्होंने आठ फ़ीसदी विकास दर का लक्ष्य हासिल करने की भी घोषणा की. उन्होंने यह भी लक्ष्य निर्धारित किया है कि देश में खपत को बढ़ावा दिया जाएगा और मांग को बढ़ाने की भी कोशिश की जाएगी. प्रधानमंत्री जियाबाओ की घोषणा के साथ ही नेशनल पीपुल्स कांग्रेस का सालाना सत्र शुरू हो गया है.

चिंता

बीजिंग से बीबीसी संवाददाता जेम्स रेनॉल्ड्स के मुताबिक़ कम्युनिस्ट पार्टी को इसकी चिंता है कि अगर विकास दर आठ फ़ीसदी से कम हुई, तो देश में सामाजिक अस्थिरता आ सकती है.

1.3 अरब की आबादी वाले चीन जैसे विकासशील देश में एक निश्चित विकास दर को बनाए रखना इसलिए भी ज़रूरी है ताकि शहरी और ग्रामीण लोगों के लिए रोज़गार के अवसर बढ़ाएँ जाएँ. लोगों की आमदनी बढ़े और सामाजिक स्थिरता भी क़ायम रहे वेन जियाबाओ

1.3 अरब की आबादी वाले चीन जैसे विकासशील देश में एक निश्चित विकास दर को बनाए रखना इसलिए भी ज़रूरी है ताकि शहरी और ग्रामीण लोगों के लिए रोज़गार के अवसर बढ़ाएँ जाएँ. लोगों की आमदनी बढ़े और सामाजिक स्थिरता भी क़ायम रहे

उनका कहना है कि अगर लोगों को नौकरी नहीं मिलेगी तो वे यह सवाल करने लगेंगे कि कम्युनिस्ट पार्टी सत्ता में क्यों बनी रहनी चाहिए.

बीबीसी संवाददाताओं का कहना है कि इसी कारण पार्टी ने अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए पैकेज की घोषणा की है.

चीन के प्रधानमंत्री ने यह भी उम्मीद जताई है कि शहरों में 90 लाख नई नौकरियों के अवसर पैदा किए जाएँगे. साथ ही स्थानीय प्रशासन का बजट भी 25 फ़ीसदी बढ़ाया जाएगा.

संबोधन

अपने संबोधन में उन्होंने कहा, "1.3 अरब की आबादी वाले चीन जैसे विकासशील देश में एक निश्चित विकास दर को बनाए रखना इसलिए भी ज़रूरी है ताकि शहरी और ग्रामीण लोगों के लिए रोज़गार के अवसर बढ़ाएँ जाएँ. लोगों की आमदनी बढ़े और सामाजिक स्थिरता भी क़ायम रहे."

चीन पर भी आर्थिक संकट की मार पड़ी है.प्रधानमंत्री जियाबाओ ने यह स्वीकार किया कि चीन आर्थिक संकट से गुज़र रहा है.उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि देश में समुचित सामाजिक सुरक्षा प्रावधानों और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी है.

बीबीसी संवाददाताओं का कहना है कि ज़्यादा से ज़्यादा लोगों की नौकरी जा रही है और सामाजिक सुरक्षा प्रावधानों की कमी के कारण समस्या है.

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