नीलामी रोकने पर सहमति

उनके सलाहकार प्रोफ़ेसर लेसलर कर्ट्स ने एक निजी टेलीविज़न चैनल से बात करते हुए कहा है कि जेम्स ओटिस अपने वकीलों के ज़रिए नीलामी रुकवाने की कोशिश कर रहे हैं.
हालांकि अभी नीलामी रोकने की अधिकृत घोषणा नहीं हुई है.
दूसरी ओर अमरीका में भारतीय समुदाय के एक अहम सदस्य और बड़े होटल व्यावसायी संत सिंह चटवाल ने बीबीसी से कहा है कि उनकी जानकारी में अभी नीलामी रुकी नहीं है और वे इसमें भाग लेने जा रहे हैं.
न्यूयॉर्क में गाँधी जी की जिन सामानों की नीलामी गुरुवार को होनी है, उनमें महात्मा गाँधी का एक चश्मा, जेब घड़ी, एक जोड़ी चमड़े की चप्पलें, एक पीतल की थाली और कटोरी शामिल हैं.
वैसे अभी यह भी स्पष्ट नहीं हुआ है कि यदि नीलामी रोकी जा रही है तो महात्मा गांधी के सामान का क्या होगा.
इससे पहले भारत सरकार ने महात्मा गाँधी की निजी सामान की नीलामी करने वाले जेम्स ओटिस की शर्त ठुकरा दी थी.
सरकार ने कहा था कि वह महात्मा गाँधी की निजी सामान को वापस लाने के लिए अमरीका और अंतरराष्ट्रीय क़ानून एजेंसियों के संपर्क में है.
एक टीवी चैनल से बातचीत में विदेश राज्य मंत्री आनंद शर्मा ने कहा, "गाँधी जी ख़ुद कभी इस तरह की परिस्थितियों के लिए तैयार नहीं होते. भारत सरकार अपने नागरिकों का प्रतिनिधित्व करती है. वह इस तरह के समझौते नहीं कर सकती जहाँ संसाधनों को विशिष्ट क्षेत्र के लिए आवंटित करने की बात हो."
क़ीमत
गाँधी जी के सामानों की नीलामी करने वाले जेम्स ओटिस ने अपनी शर्त में कहा था कि अगर भारत सरकार अपने बजट का एक बड़ा हिस्सा ग़रीबों के स्वास्थ्य की देखभाल पर ख़र्च करे तो वह महात्मा गाँधी कि निजी वस्तुओं को नीलामी से वापस ले सकते हैं.
इसके जवाब में विदेश राज्य मंत्री आनंद शर्मा ने कहा कि ओटिस इस बात को जानते हैं कि भारत सरकार ग़रीबों के लिए चलाई जा रही योजनाओं के अलावा भी ग़रीबों की शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर बजट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ख़र्च करती है.
ओटिस की इस मांग पर कि भारत अपने दूतावासों के ज़रिए दुनिया के 78 देशों में गांधीवादी विचारों के प्रचार-प्रसार में मदद करे, विदेश राज्य मंत्री ने कहा कि भारत पहले से ही महात्मा गाँधी के विचारों को बढ़ावा दे रहा है.
एंटीकोरम कंपनी ने महात्मा गाँधी की इन निजी वस्तुओं की आरक्षित क़ीमत 20 से 30 हज़ार अमरीकी डॉलर के बीच रखी है.


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