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अटल रूपी ब्रह्मास्त्र से भाजपा की लखनऊ किला फतह की रणनीति

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अटल के चुनावी मैदान में न उतरने से सपा संजय दत्त को उतारकर इस प्रतिष्ठित सीट पर कब्जा करना चाहती है तो बहुजन समाज पार्टी(बसपा) की योजना पूर्व केंद्रीय मंत्री व लखनऊ के पूर्व महापौर अखिलेश दास के सहारे यह सीट अपने खाते में लाने की है। भाजपा किसी भी हालत में इस प्रतिष्ठित सीट को गंवाना नहीं चाहती।

भाजपा ने अटल के करीबी लालजी टंडन को चुनावी अखाड़े में उतार दिया है। पार्टी की रणनीति अटल के नाम-काम और लखनऊ से उनके रिश्ते जैसे मुद्दों पर केंद्रित रहेगी। पार्टी अटल के नाम को भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी।

गत सोमवार को लाल जी टंडन के रोड शो में कार्यकर्ता जहां अटल बिहारी वाजपेयी जिंदाबाद के नारे लगा रहे थे वहीं टंडन अपने आगे अटल की तस्वीर रखे हुए थे। अटल के प्रति कार्यकर्ताओं का यह भावनात्मक लगाव तो था ही इसके अलावा पार्टी की यह राजनीतिक मजबूरी भी है। टंडन कह चुके हैं कि लखनऊ तो हमेशा अटल जी का ही रहेगा, मैं तो उनकी चरण पादुका लेकर चुनाव में उतरूंगा। टंडन को बखूबी पता है कि मुन्नाभाई जैसे लोकप्रिय प्रतिद्वंद्वी को हराने के लिए अटल का नाम ही एक अचूक हथियार है।

सन 1991 से भाजपा के वयोवृद्ध नेता अटल बिहारी वाजपेयी लखनऊ सीट का प्रतिनिधित्व करते आए हैं। विपक्षी दलों ने उनके सामने राज बब्बर, राम जेठमलानी और कर्ण सिंह जैसे कद्दावरों को मैदान में उतारा लेकिन बाजपेयी की लोकप्रियता के सामन कोई नहीं टिक सका। वाजपेयी अस्वस्थ होने के कारण इस बार चुनाव नहीं लड़ रहे हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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