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जन्म-मृत्यु पंजीकरण में केरल, दिल्ली और पांडिचेरी पहले स्थान पर

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नई दिल्ली, 5 मार्च (आईएएनएस)। जन्म और मृत्यु के मुख्य पंजीयकों का राष्ट्रीय सम्मेलन गुरुवार को नई दिल्ली में शुरू हुआ। इस क्षेत्र में सराहनीय कार्य के लिए केरल को प्रथम और तमिलनाडु को द्वितीय पुरस्कार प्रदान किया गया। मध्य आकार के राज्यों में दिल्ली को और छोटे राज्यों केन्द्र शासित प्रदेशों में पांडिचेरी पहले स्थान पर रहा।

भारत के महापंजीयक डी. के. सीकरी ने अपने उद्घाटन भाषण में कहा कि राष्ट्रीय जनसंख्या नीति 2000 का लक्ष्य 2010 तक जन्म और मृत्यु का शत-प्रतिशत पंजीकरण प्राप्त करना है। जन्म पंजीकरण का वर्तमान स्तर 68 प्रतिशत और मृत्यु पंजीकरण का 63 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि इन वर्षो में पंजीकरण के स्तर में उत्तरोत्तर वृद्धि हुई है।

आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश राज्यों में पिछले चार वर्षो में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। लेकिन जहां तक उत्तर प्रदेश और बिहार का संबंध है, प्रयासों में तेजी लाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इन राज्यों को छोड़कर देश में जन्म पंजीकरण 82.5 प्रतिशत और मृत्यु पंजीकरण 72 प्रतिशत है।

सीकरी ने कहा कि सभी संबद्घ व्यक्तियों को यह जानने की आवश्यकता है कि जन्म और मृत्यु पंजीकरण राष्ट्रीय जिम्मेदारी है और हर किसी से यह प्रचार करने की आवश्यकता है कि जन्म का पंजीकरण संयुक्त राष्ट्र समझौते की धारा सात के अधीन एक बच्चे का सार्वभौमिक अधिकार है और भारत की इस समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले देशों में शामिल है।

प्रमुख राज्यों में इस क्षेत्र में सराहनीय कार्य के लिए केरल को प्रथम और तमिलनाडु को द्वितीय पुरस्कार प्रदान किया गया था। मध्य आकार के राज्यों में दिल्ली को प्रथम और हिमाचल प्रदेश को द्वितीय करार किया गया था जबकि छोटे राज्यों केन्द्र शासित प्रदेशों में पांडिचेरी को प्रथम पुरस्कार और चंडीगढ़ को द्वितीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

इस दो दिवसीय सम्मेलन का उद्देश्य विभिन्न राज्यों में जन्म और मृत्यु के पंजीकरण के मामले में स्थिति का जायजा लेना और सार्वभौम पंजीकरण के राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एक दूसरे के अनुभवों को जानने तथा मिलजुलकर काम करना है।

इस सम्मेलन में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय, महिला और बाल विकास मंत्रालय तथा योजना आयोग के प्रतिनिधि, विभिन्न राज्यों के प्रधान सचिव और सचिव, विभिन्न राज्यों के मुख्य पंजीयक और उनके सहयोगी तथा यूनीसेफ और प्लान इंडिया के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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