मिसाइल प्रतिरोधी प्रणाली का परीक्षण शुक्रवार को
रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के एक अधिकारी ने कहा कि सभी तैयारियां पूरी हो गईं हैं और परीक्षण को सफल बनाने के लिए वैज्ञानिक कार्य कर रहे हैं।
उड़ीसा के तटीय व्हीलर द्वीप से किया जाने वाला परीक्षण पाकिस्तान की हत्फ और गोरी मिसाइलों के खिलाफ विश्वसनीय प्रतिरोध स्थापित करेगा। भारत ने वर्ष 2006 में मिसाइल रोधी प्रणाली का पहला परीक्षण किया था।
अधिकारी ने बताया कि बंगाल की खाड़ी में एक नौसैनिक पोत से सतह से सतह पर मार करने वाली धनुष मिसाइल का प्रक्षेपण दुश्मन मिसाइल के रूप किया जाएगा, जिसे व्हीलर द्वीप के नजदीक पृथ्वी वायु रक्षा मिसाइल से करीब 80 किलोमीटर ऊपर मार गिराया जाएगा। धनुष मिसाइल 1500 किलोमीटर मारक क्षमता वाली पाकिस्तानी गोरी मिसाइल के समान है।
वायु रक्षा प्रणाली को उपयोग के लिए प्रमाणित करने के पूर्व इसके तीन या चार परीक्षण किए जाएंगे। इस परीक्षण से कार्यक्रम के पहले चरण का परीक्षण पूरा हो जाएगा और वर्ष 2012-13 तक इसके उपयोग की अनुमति मिल जाएगी।
पृथ्वी वायु रक्षा प्रणाली का नया नाम अब प्रद्युम्न रखा गया है। डीआरडीओ ने कहा कि यह मिसाइल रोधी प्रणाली इजरायल के एरो और अमेरिका की पैट्रियाट मिसाइल प्रणाली के समान है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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