विश्वविद्यालय विश्वव्यापी वित्तीय संकट का समाधान ढूंढ़ें : राष्ट्रपति
पाटिल गुरुवार को राजस्थान विश्वविद्यालय के 25वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में समारोह को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में वित्तीय संकट ने विश्व अर्थव्यवस्था के आयामों को बदल दिया है। उन्होंने कहा कि इस संकट के असर और परिणामों से निबटना वर्तमान संस्थानों और जिम्मेदार तंत्र की एक परीक्षा होगी जिसके लिए सामूहिक प्रयासों की जरूरत है।
राष्ट्रपति ने कहा कि विश्वविद्यालय, नवीन अन्वेषणों और अनुसंधान के माध्यम से राष्ट्र को आर्थिक शक्ति , वैज्ञानिक कौशल, सामाजिक परिवर्तन की विस्तृत रूपरेखा और विश्व प्रतिस्पर्धा प्रदान करने में मदद करते हैं। उन्होंने विश्वविद्यालयों से स्थानीय मुद्दों को समझकर विशेष दूरवर्ती कार्यक्रम शुरू करने के लिए समुदायों के साथ संवाद स्थापित करने पर भी जोर दिया।
पाटिल ने कहा कि शिक्षा का लक्ष्य विद्यार्थियों को रोजगार में सक्षम, आत्मविश्वासी व ज्ञान संपन्न बनाने के साथ-साथ ऐसे व्यक्तियों को भी तैयार करना होना चाहिए जो मानव जाति की सेवा के उद्देश्य में भी सक्रिय योगदान देने के लिए तैयार रहें।
उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहें ताकि जीवन में कोई अवसर छूट न जाए।
राष्ट्रपति ने महिला शिक्षा के महत्व पर बल देते हुए कहा कि बेटी को शिक्षित करने से वह परिवार के विविध दायित्वों का बेहतर ढंग से निर्वहन करने के साथ-साथ देश व समाज की तरक्की में भी अपना योगदान कर सकती हैं।
प्रारंभ में राजस्थान विश्वविद्यालय के कुलपति एन.के. जैन ने विश्वविद्यालय द्वारा अर्जित की गई उपलब्धियों एवं चलाये जा रहे विभिन्न पाठ्यक्रमों एवं अन्य गतिविधियों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया, 'वसुधैव कुटुम्बकम्' की भावना के अनुरूप विश्वविद्यालय द्वारा अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, आस्ट्रेलिया, फ्रांस आदि देशों के विश्व प्रसिद्घ विश्वविद्यालयों के साथ एम.ओ.यू. हस्ताक्षरित किए गए हैं जिससे छात्रों एवं विभिन्न संकायों के बीच विचारों के आदान-प्रदान के साथ आपसी सहयोग संभव हो सकेगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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