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लिट्टे के घोषित समर्थक रहे हैं वाइको

vaiko chief
नई दिल्ली, 3 मार्च: श्रीलंकाई अलगाववादी संगठन लिट्टे के नेता वी प्रभाकरन के साथ भारतीय नेता वाइको के गहरे रिश्ते की पुष्टि के तौर पर वीडियो फुटेज और तस्वीरें जारी करने का श्रीलंका सरकार का निर्णय आश्चर्यजनक है, क्योंकि यह जगजाहिर है कि वाइको लिट्टे के घोषित समर्थक रहे हैं। श्रीलंका सरकार के इस निर्णय में कुछ भी नयापन नहीं है।

सवाल यह है कि श्रीलंका सरकार ऐसे सबूत पेश कर एक कड़वे सच को फिर से पुष्ट कर आखिर क्या साबित करना चाहती है? यह सभी को मालूम है कि वाइको लिट्टे का खुलेआम समर्थन करते रहे हैं।

यह भी गुप्त नहीं है कि वाइको ने 1989 में भारत और श्रीलंका दोनों मुल्कों के कानूनों का उल्लंघन कर समुद्र मार्ग से श्रींलका की गुप्त यात्रा की थी। तब वाइको सांसद हुआ करते थे और उस वक्त भारतीय सेना श्रीलंका में विद्रोहियों से निपटने में जुटी हुई थी।

तब वाइको द्रमुक में हुआ करते थे। उन्होंने अपने नेता एम़ करुणानिधि को विश्वास में लिए बगैर श्रीलंका की गुप्त यात्रा की थी। इससे करुणानिधि और वाइको के रिश्तों में दरार आ गई थी। उस वक्त वी़ गोपालस्वामी के नाम से जाने जाने वाले वाइको ने द्रमुक से नाता तोड़कर एमडीएमके नामक पार्टी बनाई।

राजीव गांधी की हत्या की प्रतिक्रिया में लिट्टे पर प्रतिबंध लगाए जाने के पहले से ही वाइको और लिट्टे के बीच मधुर संबंध रहे हैं। जब तमिलनाडु पुलिस और सीबीआई ने राजीव हत्याकांड के बाद लिट्टे के खिलाफ अभियान चलाया तो उन्हें लिट्टे से जुड़े 464 वीडियो और भारी संख्या में तस्वीरें मिलीं।

इनमें से एक वीडियो वाइको की श्रीलंका यात्रा से जुड़ा था। इसमें वह प्रभाकरन और कई लिट्टे नेताओं के साथ नजर आए।

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