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सूडान के राष्ट्रपति के ख़िलाफ़ वारंट

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सूडान के राष्ट्रपति के ख़िलाफ़ वारंट

न्यायालय ने पहली बार किसी राष्ट्राध्यक्ष के विरूद्ध इस तरह का कोई वारंट जारी किया है.

सूडानी राष्ट्रपति ने पहले ही अपने ऊपर लगाए गए आरोपों से इनकार करते हुए कह दिया है कि उनके गिरफ़्तारी वारंट का महत्व काग़ज़ पर लगी रोशनाई से अधिक कुछ नहीं है और हेग स्थित न्यायाधिकरण चाहे तो उस गिरफ़्तारी वारंट को 'खा' सकता है.

अदालत की प्रवक्ता का कहना है कि अदालत ने राष्ट्रपति बशीर को जनसंहार के आरोप से बरी कर दिया है क्योंकि अभियोजन पक्ष इस मामले के पर्याप्त सबूत पेश नहीं कर सका.

इससे पहले आरोप लगाए गए थे कि उनकी सरकार ने दारफ़ुर में स्थानीय लोगों को मौत की घाट उतार दिया था.

सूड़ान की राजधानी खारतोम में इस फ़ैसले का इंतज़ार करते हुए तनाव में थे और उन्हें डर था कि इस फ़ैसले के बाद अव्यवस्था फैल सकती है.

संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि दारफ़ुर संघर्ष में पिछले छह वर्षों के दौरान तीन लाख लोग मारे गए हैं और 27 लाख लोगों को विस्थापित होना पड़ा है.

वारंट

दारफ़ुर की हिंसा में तीन लाख लोग मारे गए हैं और 27 लाख विस्थापित हुए हैं

हेग में आईसीसी की प्रवक्ता लॉरेंस ब्लैरॉन ने कहा है कि अदालत यथाशीघ्र ही सूडान सरकार को इस आदेश से अवगत करवाएगी.

लेकिन अभी ये स्पष्ट नहीं है कि इस वारंट के बाद क्या होगा.

अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय के मुख्य अभियोजक लुइज़ मोरेनो ओकैम्पो पहले ही कह चुके हैं कि इस वारंट अपने आप में कोई शक्ति नहीं रखता क्योंकि अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय की अपनी कोई पुलिस नहीं है.

उन्होंने कहा था कि न्यायालय को ये वारंट सूडान सरकार को थमाना होगा और इस बात की संभावना बहुत कम है कि सूडान सरकार इसपर अमल करेगी.

न्यायालय ने इससे पहले वर्ष 2007 में दो लोगों - सूडान के मानवीय मामलों के मंत्री अहमद हारून और हथियारबंद गुट जंजावीद के नेता अली अब्दुल रहमान - के ख़िलाफ़ गिरफ़्तारी वारंट जारी किए थे.

मगर सूडान सरकार ने दोनों लोगों को न्यायालय को सौंपने से इनकार कर दिया है.

कूटनीति

पश्चिम के कई देश बशीर को गिरफ़्तार किए जाने के पक्षधर हैं लेकिन अफ़्रीका और अरब के कई देशों का मानना है कि इससे सूडान में तनाव और हिंसा में वृद्धि होगी.

सूडान के उपराष्ट्रपति सलवा कीर ने कहा है कि सूडानवासी राष्ट्रपति बशीर पर लगाए गए आरोपों से आहत हैं और इस संकट के हल के लिए कूटनीतिक और राजनीतिक प्रयास होने चाहिए.

अफ़्रीकी संघ और अरब लीग के सदस्य राष्ट्रों ने भी कहा है कि किसी तरह का वारंट जारी करने के लिए एक साल तक प्रतीक्षा की जानी चाहिए अन्यथा इससे सूड़ान में संकट और गहरा सकता है.

संयुक्त राष्ट्र में सुरक्षा परिषद के पाँचों सदस्यों के बारे में अनुमान है कि उनमें सूडान के मुद्दे पर मतभेद हैं.

अमरीका, फ़्रांस और ब्रिटेन इस पक्ष में हैं कि राष्ट्रपति बशीर को तत्काल कटघरे में खड़ा किया जाए.

मगर राजनयिकों के अनुसार सूडान के साथ मज़बूत आर्थिक संबंध रखनेवाला चीन और रूस चाहते हैं कि अभी किसी तरह का वारंट नहीं जारी किया जाना चाहिए.

अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय दुनिया का पहला स्थायी युद्धापराध न्यायालय है जो वर्ष 2002 से अस्तित्व में आया.

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