'नेपाल की पूर्व राजमाता राजमहल संग्रहालय छोड़ने की इच्छुक'

काठमांडू, 4 मार्च (आईएएनएस)। नेपाल में संग्रहालय में तब्दील कर दिए गए नारायणहिती राजमहल के कपाट आम जनता के लिए खोले जाने के साथ ही, उसी परिसर की एक हवेली में रहने वाली पूर्व राजमाता अब उसे छोड़ देने की इच्छुक हैं।

पूर्व नरेश ज्ञानेंद्र की सौतेली मां रत्ना शाह, अपने पति एवं पूर्व नरेश महेंद्र से लेकर तीन नरेशों के शासनकाल के दौरान नेपाल की सबसे ताकतवर महिला रही थीं। जनता की जिज्ञासा का केंद्र बन चुके नारायणहिती को अब वह छोड़कर चली जाना चाहती हैं।

समझा जाता है कि पूर्व राजमाता ने ही वर्ष 2005 में ज्ञानेंद्र को सेना की मदद से सत्ता पर निरंकुश कब्जा करने के लिए उकसाया था। उन्होंने अपने आखिरी दिन, भीड़भाड़ से दूर तीर्थयात्रियों के लिए बनाए गए स्थल में बिताने की इच्छा व्यक्त की है।

विख्यात पशुपतिनाथ मंदिर के परिसर में बने गुहेश्वरी मंदिर के पास स्थित अतिथि गृह का इस्तेमाल पहले धार्मिक उत्सवों के लिए होता था। रत्ना शाह की दो दत्तक पुत्रियों का विवाह भी इसी जगह हुआ था। राजशाही की समाप्ति के बाद से यह अतिथि गृह स्थानीय लोगों के पास है। 81 वर्षीया पूर्व राजमाता ने अपनी इच्छा संबद्ध प्रशासन तक पहुंचाने को कहा है।

पिछले साल सिंहासन से हटाए गए ज्ञानेंद्र ने सरकार से अनुरोध किया था कि उनकी सौतेली मां को उसी राजमहल में रहने की इजाजत दी जाए। जहां वे 1955 रानी बनकर दाखिल हुई थीं। सरकार ने ज्ञानेंद्र का अनुरोध मान लिया था लेकिन अब पूर्व राजमाता स्वंय इस महल को छोड़ देना चाहती हैं, जहां अब राजपरिवार कोई सदस्य नहीं है।

इस राजमहल को संग्रहालय घोषित किए जाने के साथ-साथ वहां वर्ष 2001 के हत्याकांड की काली यादें फिर से ताजा हो उठी हैं। क्योंकि

सरकार ने उस घटना की नए सिरे से जांच के आदेश भी दे दिए हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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