'झुलस रही हैं भारतीय महिलाएँ'

एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में सिर्फ़ एक वर्ष के भीतर एक लाख से ज़्यादा युवतियों की मौत आग लगने से हुई है जो दुनिया में सबसे ज़्यादा है.
आग लगने के कारण मरने वाली ज़्यादातर महिलाओं की उम्र 15 से 34 वर्ष के बीच पाई गई. इनमें से कई मामलों के तार घरेलू हिंसा से जुड़े हुए हैं. ब्रितानी चिकित्सा पत्रिका लांसेट ने यह रिपोर्ट तैयार की है.
रिपोर्ट के मुताबिक भारत में आग लगने से महिलाओं के मरने की संभावना पुरुषों के मुक़ाबले तीन गुना ज़्यादा है. घरेलू हिंसा का भी इसमें योगदान है और ख़ास कर दहेज उत्पीड़न की समस्या भी इस तरह युवतियों की मौतों के लिए ज़िम्मेदार है.
रिपोर्ट कहती है कि इस तरह के ज़्यादातार मामलों में महिला को केरोसिन तेल का इस्तेमाल कर जला दिया जाता है और इसे रसोई घर में हुई दुर्घटना के रुप में तब्दील कर दिया जाता है.
रिकॉर्ड मौतें
मृतकों के रिकॉर्ड, ग्रामीण इलाक़ो में सरकारी प्रश्नावलि और जनगणना के आँकड़ों के आधार पर वर्ष 2001 के लिए रिपोर्ट तैयार की गई है.
उस साल एक लाख 63 हज़ार लोगों की मौत आग लगने के कारण हुई. इनमें से एक लाख छह हज़ार यानी 65 फ़ीसदी महिलाएँ थीं. ये आँकड़ा पुलिस के आँकड़ों से छह गुना ज़्यादा है.
महिला अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठन इसके लिए सरकार को ज़िम्मेदार ठहराते हैं. वूमन्स राइट्स इनिशिएटिव की निदेशक इंदिरा जयसिंह का आरोप है कि सरकार इस तरह के मामलों में चुप रहती है.
रिपोर्ट के मुताबिक आग लगने से मौत होते ही पुलिस जाँच की प्रक्रिया शुरु कर देती है लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होती है. वो कहते हैं, "पुलिस कहती है कि ये शर्मनाक है और अपराध है लेकिन इसे रोकने में नाकामी ही हाथ लगी है."
उन्होंने माँग की ऐसे मामलों में शिकायत मिलने के तुरंत बाद ही पुलिस को कार्रवाई करनी चाहिए.


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