बांग्लादेश ने मरनेवालों की संख्या घटाई

बांग्लादेश के अधिकारियों ने विद्रोह के दौरान मरनेवालों की संख्या अब कम कर दी है. अब उनका कहना है कि बीडीआर के विद्रोह में 74 लोग मारे गए थे.
एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना था कि 56 अधिकारियों के शव बरामद कर लिए गए हैं और सात अब भी लापता हैं. उल्लेखनीय है कि विद्रोह के दौरान आम नागरिक भी मारे गए थे.
सोमवार को 50 लोगों का अंतिम संस्कार कर दिया गया जिसमें हज़ारों लोग मौजूद थे. ढाका स्थित बीबीसी संवाददाता मार्क डुमेट का कहना है कि सेना इस बात का जवाब नहीं दे पा रही है कि मृतकों की संख्या बताने में इतनी बड़ी गड़बड़ी कैसे हुई.
शनिवार को बांग्लादेश सेना के गुप्तचर सेवा के प्रमुख ने कहा था कि 70 अधिकारी मारे गए और 72 लापता हैं. इसके दो दिन बाद सेना प्रमुख ने कहा था कि ये संख्या सही नहीं है और केवल सात अधिकारी लापता हैं.
पिछले कुछ दिनों में अधिकारियों ने बांग्लादेश राइफ़ल्स में विद्रोह में हिस्सा लेने वाले संदिग्धों की संख्या 15 से 20 हज़ार हो सकती है. बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना का कहना था कि ये विद्रोह सुनियोजित था और इसकी जाँच जारी है. उन्होंने बताया कि उन्होंने अमरीका की एफ़बीआई और ब्रिटेन के स्कॉटलैंड यार्ड से जाँच में मदद माँगी है.
विद्रोह की शुरुआत
उल्लेखनीय है कि शुरुआत में बांग्लादेश सरकार ने विद्रोह करने वालों को आम माफ़ी की पेशकश की थी लेकिन जब मारे गए लोगों की संख्या का असल आँकड़ा सामने आया तो सरकार ने कहा कि दोषियों को सज़ा दी जाएगी.
बांग्लादेश बॉर्डर गार्ड लंबे समय से शिकायत करते आए हैं कि उन्हें सेना के जवानों के मुकाबले कम वेतन मिलता है. बांग्लादेश की राजधानी ढाका में 25 फ़रवरी को बांग्लादेश राइफ़ल्स के जवानों ने विद्रोह कर दिया था.
इसके बाद सेना और बांग्लादेश राइफ़ल्स के जवानों के बीच भारी गोलीबारी हुई थी. बीडीआर के जवानों का सशस्त्र विद्रोह ढाका के बाहर 12 अन्य शहरों में फैल गया था.
शुरुआत में कहा गया था कि वेतन, कामकाज का वातावरण और तरक्की के सवालों पर नाराज़ जवानों ने विद्रोह किया था.


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