कॉरपोरेट इतिहास का सबसे बड़ा घाटा

अग्रणी बीमा कंपनी एआईजी को पिछले वर्ष अक्तूबर से दिसंबर के बीच लगभग 62 अरब डॉलर का घाटा हुआ है जिससे शेयर बाज़ारों में तेज़ गिरावट आई है.कॉरपोरेट जगत में एक तिमाही के दौरान किसी कंपनी को हुआ यह सबसे बड़ा घाटा है.
हालाँकि इस कंपनी की ख़स्ताहाली का पता पिछले वर्ष ही चल गया था लेकिन इतने बड़े घाटे की कल्पना नहीं की गई थी.
कंपनी के वजूद के लिहाज से राहत की बात यही है कि अमरीकी सरकार ने अपने प्रोत्साहन पैकेज से 30 अरब डॉलर इसकी सहायता के लिए रखे हैं.
एआईजी को 150 अरब डॉलर की वित्तीय मदद मिल चुकी है. ये भी अपने आप में इतिहास है क्योंकि अब तक किसी भी अमरीकी कंपनी को संकट से उबारने के लिए इतनी बड़ी मदद नहीं मिली.
एआईजी को हुए इस घाटे की ख़बर फैलते ही दुनिया भर के शेयर बाज़ारों में तेज गिरावट दर्ज हुई है. अमरीकी शेयर बाज़ार का मुख्य सूचकांक डाउ जोंस सात हज़ार से नीचे फ़िसल गया जो अक्तूबर 1997 के बाद का सबसे न्यूनतम स्तर है.
इसी तरह ब्रिटेन का मुख्य सूचकांक फुटसी (एफ़टीएसई) छह साल के निचले स्तर पर कारोबार कर रहा है.
ख़तरा
अमरीकी फ़ेडरल रिज़र्व ने माना है कि एआईजी की ये स्थिति वैश्विक वित्तीय प्रणाली के ख़तरा है.
कुछ बड़े प्रोत्साहन पैकेज बैंक ऑफ़ अमेरिका - 45 अरब डॉलर सिटी समूह - 50 अरब डॉलर जेपी मोर्गन चेस - 25 अरब डॉलर वेल्स फ़ार्गो - 25 अरब डॉलर मोर्गन स्टेनली - 10 अरब डॉलर गोल्डमैन सैच - 10 अरब डॉलर
हालाँकि उम्मीद जताई गई है कि आर्थिक पैकेज मिलने से कंपनी में स्थिरता लाने में मदद मिलेगी.
एक और बुरी ख़बर ये है कि यूरोप के सबसे बड़े बैंक एचएसबीसी के सालना मुनाफे में 62 फ़ीसदी से ज़्यादा की गिरावट आई है और बैंक ने संकट से उबरने के लिए लगभग 18 अरब डॉलर जुटाने की योजना बनाई है.
एआईजी को उबारने के लिए ओबामा प्रशासन ने जो पैकेज तैयार किया है उसके मुताबिक कंपनी के संचालन में भी बदलाव होगा. एआईजी का घाटा पाटने के बदले फ़ेडरल रिज़र्व इसकी दो विदेशी इकाइयों में हिस्सेदारी ख़रीदेगा.


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