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आउटसोर्सिंग के लिए सुरक्षित नहीं भारत

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BPO
वॉशिंगटन, 2 मार्च: आतंकवाद, अपराध, दैविक आपदाएं, दूषित पर्यावरण और बीमारियां आदि कई देशों की अर्थव्‍यवस्‍था के लिए खतरा बनती जा रही हैं। मुंबई पर हुए आतंकी हमले, मैक्सिको में किडनैपिंग के बढ़ते मामले और सत्‍यम कंप्‍यूटर्स में करोड़ों के घोटाले ने आईटी उद्योग पर सीधा प्रभाव डाला है। इसका सबसे ज्‍यादा असर आउटसोर्सिंग पर पड़ा है।

दुनिया भर में आउटसोर्सिंग पर प्रख्‍यात 'दि ब्राउन-विल्‍सन ग्रुप' ने एक अध्‍ययन किया। अध्‍ययन की रिपोर्ट के बारे में जानकारी देते हुए ग्रुप के प्रमुख डाउग ब्राउन ने कहा है कि भारत और ब्राजील समेत कई ऐसे देश हैं जो अब आउटसोर्सिंग के लिए सुरक्षित नहीं रह गये हैं।

अध्‍ययन में आउटसोर्सिंग के लिए विश्‍व में सबसे असुरक्षित 25 स्‍थानों की सूची तैयार की गई है। सूची में पहले स्‍थान पर कोलंबिया का बोगोटा, दूसरे पर थाईलैंड का बैंगकॉक, तीसरे स्‍थान पर दक्षिण अफ्रीका का जोहांसबर्ग और चौथे स्‍थान पर मलेशिया का क्‍वाला लंपुर है।

इस सूची में भारत का एनसीआर (दिल्‍ली, गुणगांव, नोएडा) छठे स्‍थान पर है। नवें स्‍थान पर मुंबई, पंद्रहवें पर चंडीगढ़, 20वें स्‍थान पर पुणे, 21वें पर चेन्‍नई, 23वें पर बेंगलुरु और 25वें स्‍थान पर कोलकाता है।

आतंकवाद और अपराध बड़ा कारण

ब्राउन ने बताया कि अध्‍ययन में यह पाया गया है कि मुंबई हमलों और सत्‍यम घोटाले के बाद अमेरिका की कई बड़ी कंपनियां अब भारत से काम लेने में कतरा रही हैं। उन्‍होंने कहा कि अब कंपनियां सुरक्षित और स्‍थाई आउटसोर्सिंग चाहती हैं।

इस प्रकार अमेरिका की ग्राहक कंपनियों को दी जाने वाली सेवाओं में रुकावट के कारण संकट बढ़ गया है। कई कंपनियां अब विकल्‍प तलाश रही हैं।

रिसर्च में यह पाया गया है कि दक्षिण अफ्रीका, कोलंपिया, मलेशिया, थाईलैंड और मैक्सिको जैसे देशों में सरकारी प्रयासों के चलते थोड़ा सुधार आया है। इन देशों में आये सामाजिक बदलाव के चलते आउटसोर्सिंग भी बढ़ी है। वहीं फिलिपींस और ब्राजील जैसे देशों में आईटी उद्योग में गिरावट दर्ज हुई है।

भारत की बात करें तो बेंगलुरु जैसे शहर में भी इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर में विकास और सामाजिक सुधार उस स्‍तर पर नहीं हुए जैसी जरूरत थी। भारत में तेजी से विकास नहीं होने के कारण आउटसोर्सिंग के लिए कई कं‍पनियां लैटिन अमेरिका और पूर्वी यूरोप की तरफ रुख कर रही हैं।

अध्‍ययन में यह पाया गया है कि ज्‍यादातर कंपनियां अपने ही देश, या करीबी देश से ही आउटसोर्सिंग चाहते हैं। जिससे कंपनियों के बीच आसानी से समन्‍वय स्‍थापित किया जा सके।

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