देश में नई सरकार चुनने के लिए 16 अप्रैल से 13 मई तक पांच चरणों में होगा मतदान (राउंडअप)

मुख्य निर्वाचन आयुक्त एन. गोपालस्वामी ने सोमवार को राजधानी में चुनाव कार्यक्रम की विधिवत घोषणा की।

लोकतंत्र के इस महापर्व के दौरान 545 सदस्यीय 15वीं लोकसभा के गठन के लिए चुनाव सम्पन्न कराया जाएगा। इसमें 60 लाख से अधिक कर्मचारियों, पुलिसकर्मियों और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की जाएगी।

पहले चरण में 16 अप्रैल को 124 सीटों पर, दूसरे चरण में 23 अप्रैल को 141, तीसरे चरण में 30 अप्रैल को 107, चौथे चरण में सात मई को 85 और पांचवें और अंतिम चरण में 13 मई को 86 सीटों पर मतदान कराया जाएगा।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने कहा कि नई लोकसभा का गठन दो जून के पहले तक हो जाएगा।

गोपालस्वामी ने कहा कि लोकसभा के साथ ही आंध्र प्रदेश, उड़ीसा और सिक्किम विधानसभा के लिए भी चुनाव कराए जाएंगे। इसके साथ ही मिजोरम, झारखंड और कर्नाटक की एक-एक सीट पर और नागालैंड की चार सीटों पर उपचुनाव भी कराए जाएंगे।

सेंटर फॉर द मीडिया स्टडीज की ओर से किए गए एक अध्ययन के अनुसार दुनिया के सबसे बड़े इस चुनाव में 100 अरब रुपये के लागत की संभावना है।

पूरे पांच साल बाद होने जा रहे इस चुनाव की घोषणा का सभी राजनीतिक दलों ने स्वागत किया है। इससे पहले अप्रैल-मई 2004 में हुए आम चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार की हार हुई थी और केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की सरकार बनी थी।

भाजपा प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने कहा, "हमें पूरा भरोसा है कि 16 मई को मतगणना की समाप्ति के बाद देश में लालकृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में नई सरकार गठित होगी।"

उधर कांग्रेस प्रवक्ता जयंती नटराजन ने कहा, "हम चुनावी तारीखों की घोषणा किए जाने का स्वागत करते हैं। हमें विश्वास है कि चुनाव पूरी तरह स्वतंत्र व निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराया जाएगा।"

स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव सम्पन्न कराने के लिए देश भर में 40 लाख से अधिक कर्मचारियों और 21 लाख से अधिक सुरक्षाकर्मियों को 828,800 मतदान केंद्रों पर तैनात किया जाएगा। यह संख्या वर्ष 2004 में तैनात किए गए कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों की संख्या से 20 प्रतिशत अधिक है। इस बार कुल 13.6 लाख इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन का उपयोग किया जाएगा।

गोपालस्वामी ने कहा कि अस्थिर जम्मू एवं कश्मीर सहित देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में पांच चरणों में मतदान होगा, जबकि बिहार में चार चरणों में मतदान कराया जाएगा।

महाराष्ट्र व पश्चिम बंगाल में तीन चरणों मतदान होगा। आठ राज्यों आंध्र प्रदेश, असम, झारखंड, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, मणिपुर, उड़ीसा और पंजाब में दो चरणों में मतदान सम्पन्न होगा।

बाकी 15 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में एक ही चरण में मतदान सम्पन्न करवा लिया जाएगा।

लोकसभा सीटों के परिसीमन के बाद यह पहला आम चुनाव है।

20 अप्रैल को सेवानिवृत्त हो रहे मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने चुनाव में धन बल के इस्तेमाल पर चिंता जाहिर की।

उन्होंने कहा, "हमने अवैध धन बल के इस्तेमाल को गंभीरता से लिया है। मतदान अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे प्रत्याशियों द्वारा किए जाने वाले खर्चो पर कड़ी निकगरानी रखें।"

गोपालस्वामी ने कहा कि चुनाव तारीखों की घोषणा राजनीतिक दलों, मुख्य सचिवों, पुलिस महानिदेशकों और सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों से विचार-विमर्श करने के बाद की गई।

उन्होंने कहा कि इन तारीखों की घोषणा में स्थानीय छुट्टियों, पर्वो और स्कूलों की वार्षिक परीक्षाओं को ध्यान में रखा गया है।

निर्वाचन आयुक्त ने कहा कि पूरे देश की मतदाता सूचियों में संशोधन किया गया है और 543 में से 522 निर्वाचन क्षेत्रों में फोटो पहचान पत्र का उपयोग किया जाएगा। 545 सदस्यीय लोकसभा में एंग्लो-इंडियन समुदाय के दो सदस्यों का मनोनयन राष्ट्रपति करते हैं।

चुनावी तारीखों की सोमवार को की गई घोषणा के एक दिन पहले ही राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने गोपालस्वामी की उस विवादित सिफारिश को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने चुनाव आयुक्त नवीन चावला को पद से हटाए जाने के लिए कहा था। अब स्थिति यह है कि गोपालस्वामी की सेवानिवृत्ति के बाद नवीन चावला मुख्य चुनाव आयुक्त का पदभार संभालेंगे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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