मध्य प्रदेश में राष्ट्रवाद की पाठशाला

मध्य प्रदेश में राष्ट्रवाद की पाठशाला

मध्य प्रदेश सरकार राष्ट्रवाद का पाठ राज्य के स्कूलों और कालेजों में पढा़एगी जिसमें छात्रों को देश विरोधी ताक़तों से बचने के गुर सिखाए जाएँगे. वहाँ राष्ट्रवाद का पाठ राज्य के स्कूलों और कालेजों में पढा़या जाएगा जिसके अंतर्गत छात्रों को देश विरोधी ताक़तों से सचेत रहने और निपटने के गुर सिखाए जाएँगे.

इसके तहत जहाँ प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों और कालेजों में राष्ट्रीय अस्मिता और देश प्रेम जगाने वाले विषयों पर ख़ास क्लास शुरू की जाएँगी वहीँ कालेज के छात्रों को अपने कोर्स के तहत 'सामाजिक सरोकारों' के विषयों पर एक प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने को कहा जाएगा.

सूबे के कालेजों में विद्यार्थियों को अपने कोर्स के दौरान अपने विषय से जुड़ी छह रिपोर्ट तैयार करनी होती हैं जिनमें से एक अब राष्ट्रवाद के विषय से संबंधित होगी.

कोर्स के भीतर छात्रों को आतंकवाद, दूसरी आकस्मिक और प्राकृतिक आपदाओं के समय किस तरह का व्यवहार करना है, किसे इसकी सूचना देनी है और प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड) की ट्रेनिंग भी दी जाएगी.

राज्य शासन की तरफ़ से ये कार्यक्रम 'जन्मभूमि रक्षा अभियान' के तहत चलाया जा रहा है जिसकी शुरुआत शनिवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल में एक कार्यक्रम के दौरान मशाल जला कर की.

इस मशाल से जलाई गई दूसरी सैंकड़ों मशालें राज्यभर के सभी सरकारी कॉलेजों में ले जाई जाएंगीं. कुछ ही दिनों में होने वाली बोर्ड परीक्षा के मद्देनज़र स्कूलों को इस मशाल रैली से अलग रखा गया है.

प्रदेश व्यापी अभियान

भोपाल से संभागों और फिर ज़िलों के सब-डिविजन स्तर के शहरों से छोटे क़स्बों और गाँव-गाँव होती हुई कालेजों तक ले जाया जाने वाला ये मशाल कार्यक्रम 15 अगस्त तक जारी रहेगा.

फ़रवरी के मध्य में दिल्ली में हुई केंद्रीय शिक्षा सलाहाकार बोर्ड (कैब) की बैठक से वापस आकर मध्य प्रदेश की शिक्षा मंत्री अर्चना चिटनिस ने कहा था कि केंद्रीय मानव संसाधन विभाग ने ये बैठक आने वाले लोकसभा चुनाव के मद्देनज़र बुलाई थी.

कैब के एजेंडे में सिर्फ़ धर्म विशेष योजनाओं पर ध्यान दिया गया और संस्कृत का कहीं ज़िक्र ही नहीं हुआ.

आने वाले लोक सभा चुनावों के कारण आचार संहिता लागू होने के पहले ही कर्मचारियों के लिए छठा वेतन आयोग लागू करने की कोशिश में लगे शिवराज सिंह चौहान के देर से पहुँचने के बावजूद शिक्षा संस्थानों से लाए गए छात्रों और कर्मियों ने नारे लगाकर उनका स्वागत किया.

बिरसा मुंडा, रानी अवंतिबाई, चन्द्रशेखर आजा़द, तांत्या भील, अशफ़ाकउल्ला, सुल्तान सिंह नाखारिया और परमानन्द पटेल की तस्वीरों पर मालार्पण के बाद कार्यक्रम की शुरुआत हुई.

जन्म भूमि रक्षा अभियान रैली में भाग लेते लोग

मुख्यमंत्री ने दावा किया कि हालांकि भारत की आजा़दी के लिए लाखों लोगों ने बलिदान दिया लेकिन स्कूल की किताबों में सिर्फ़ गांधी और नेहरु का ही ज़िक्र आता है बाक़ी शहीदों की कु़र्बानियों को नज़र अंदाज़ कर दिया गया है.

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि शासन ने भोपाल में एक विशाल शहीद स्थल बनाने का फै़सला किया है जिस पर आज़ादी के बाद भारत की अन्य देशों के साथ हुई जंगों में शहीद हुए उन सभी सैनिकों के नाम लिखे होंगे जिनका ताल्लुक़ मध्य प्रदेश से था.

भाषण के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य पुलिस को दिए गए अपने उस निर्देश की बात की जिसमें कहा गया है कि वे बांग्लादेशी घुसपैठियों को ढूंढ कर उन्हें राज्य से बाहर भेजें.

मुख्यमंत्री ने जनता से कहा कि वह ऐसे लोगों के बारे में प्रशासन को सूचित करे और खु़द भी सावधान रहे. शिक्षा मंत्री का कहना था कि सरकार के इस कार्यक्रम का प्रयास छात्रों को बेहतर संस्कार देना है.

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