हसीना ने सैन्य अधिकारियों से मुलाकात की, मृतकों की संख्या 100 पार पहुंची (लीड-1)

पुलिस ने बीडीआर के पांच नेतृत्वकर्ताओं के खिलाफ मामला दर्ज किया है। उधर बीडीआर मुख्यालय में कई सारे लापता सैन्य अधिकारियों की तलाश अभी भी जारी है।

मीडिया रिपोटरें के मुताबिक रक्षा मंत्रालय का भी प्रभार संभाल रही हसीना को बैठक के दौरान सैन्य अधिकारियों की ओर से कुछ तल्ख सवालों का सामना करना पड़ा।

बीडीआर मुख्यालय में ज्यादातर शव सामूहिक कब्रों व नालों से बरामद किए गए हैं।

स्टार ऑनलाइन ने लिखा है कि प्रधानमंत्री हसीना ने सैन्य अधिकारियों की बातें सुनी और सरकार द्वारा विद्रोह के खत्मे के लिए की गई कार्रवाइयों के बारे में विस्तार से चर्चा की।

हालांकि सेना मुख्यालय में आयोजित इस बैठक में क्या चर्चा हुई, इसके बारे में कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।

उधर सरकार ने बीडीआर के जवानों की तलाशी के लिए व्यापक तौर पर अभियान शुरू कर दिया है। विद्रोह की समाप्ति के बाद भी सैकड़ों जवान ढाका से फरार हो गए हैं। शनिवार को लालबाग पुलिस थाने में 1,000 बीडीआर विद्रोहियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

इनमें बीडीआर के एक उप सहायक निदेशक तौहिद उल आलम सहित पांच विद्रोहियों का नाम विशेष तौर पर शामिल हैं। तौहिद उल आलम ने विद्रोह के घंटे भर बाद बुधवार को हसीना से मुलाकात करने वाले बीडीआर दल का नेतृत्व किया था।

उधर, सरकार ने शनिवार को कहा कि विद्रोह करने वाले अर्धसैनिक बल के जवानों के खिलाफ विशेष अदालत में मुकदमा चलेगा।

मंत्रिपरिषद और आवामी लीग के वरिष्ठ नेताओं की बैठक के बाद ग्रामीण विकास और सहकारिता मंत्री सईद अशराफुल इस्लाम ने कहा, "कानून मंत्रालय से हत्यारों और लुटेरों के खिलाफ त्वरित मुकदमा चलाने के लिए कानून बनाने को कहा गया है।" उन्होंने कहा कि संसद से कानून को पास करवाया जाएगा।

बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री शेख हसीना वाजेद ने की। बैठक में विद्रोह में बाहरी तत्वों के हाथ होने की आशंका के बारे में भी चर्चा की गई।

इस्लाम ने कहा कि यह देश के बहादुर अधिकारियों और जवानों को मारने का एक षड़यंत्र था, जिसमें बाहरी तत्वों का हाथ हो सकता है।

इसी बीच देश में अर्धसैनिक बल 'बांग्लादेश राइफल्स' (बीडीआर) के जवानों की बगावत के दौरान सैन्य अधिकारियों की हत्या की जांच को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है।

स्थानीय समाचार पत्र 'न्यू एज' के मुताबिक प्रमुख विपक्षी दल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने इस पूरे मामले की सर्वदलीय जांच कराने की मांग की है।

बीएनपी प्रमुख खालिदा जिया ने विद्रोह के दौरान प्रधानमंत्री शेख हसीना की ओर से उठाए कदमों और विद्रोही जवानों को माफी दिए जाने को बड़ी रणनीतिक भूल करार दिया है।

लेकिन हसीना की पार्टी अवामी लीग और सहयोगी दलों ने विद्रोह पर जिया की 'लंबी चुप्पी' पर सवाल खड़ा किया है। सत्ताधारी अवामी लीग ने कहा है कि विद्रोही सैनिकों को माफी विद्रोह को खत्म करने के मकसद से दी गई है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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