जीवन बीमा उद्योग के समक्ष चुनौतीपूर्ण समय

चेन्नई, 1 मार्च (आईएएनएस)। पिछले आठ वर्षो से काफी तेजी से विकास करने वाले देश के निजी जीवन बीमा उद्योग के समक्ष आने वाला समय काफी कठिन होगा। वैश्विक आर्थिक संकट और कमजोर शेयर बाजार के कारण अगले दो वर्ष इस सेक्टर के लिए काफी चुनौतीपूर्ण होंगे।

बीमा उद्योग के एक अधिकारी ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा, "बीमाकर्ताओं को आय शुल्क में कमी, खर्च में बढ़ोतरी, पूंजी सुरक्षा और बीमा पॉलिसियों के मियाद से पहले टूटने की आंशका से जूझना होगा। कई निजी जीवन बीमा कंपनियों के 'ब्रेकइवेन प्वाइंट' को अगले कुछ वर्षो के लिए बढ़ा दिया गया है।"

ब्रेकइवेन प्वाइंट वह बिंदु होता है जहां कंपनी की लागत और राजस्व बराबर हो जाता है। उन्होंने कहा कि दो वर्ष 2009 और 2010 काफी महत्वपूर्ण होंगे।

अक्टूबर 2008 से जनवरी 2009 के बीच व्यापार के रुझानों से पता चलता है कि नई चुनौतियों ने जीवन बीमा उद्योग की रफ्तार को धीमा कर दिया है।

जनवरी 2009 में 20 निजी बीमा कंपनियों ने सम्मिलित रूप से 13 लाख पॉलिसियां बेचकर 26.42 अरब रुपये इकट्ठा किए, जबकि दिसंबर में 14 लाख पॉलिसियां बिकी थीं और 17.24 अरब रुपये इकट्ठा हुए थे।

नवंबर 2008 में 11.4 लाख पॉलिसियों से 23.06 अरब रुपये और अक्टूबर में 10.9 लाख पॉलिसियों से 23.04 अरब रुपये इकट्ठा हुए थे।

इस बारे में रिलायंस लाइफ के मुख्य कार्यकारी पी. नंदगोपाल ने कहा कि आर्थिक संकट ने केवल अल्प अवधि की पॉलिसियों पर प्रभाव डाला है।

उधर, बजाज एलियांस लाइफ के मुख्य कार्यकारी कामेश गोयल की राय अलग थी। उन्होंने कहा कि हालांकि पॉलिसियों की ब्रिकी घटी है लेकिन अब भी बीमा लंबे समय के लिए धन इकट्ठा करने का बेहतर स्रोत है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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