चावला का सीईसी बनने का रास्ता साफ, बर्खास्त करने की सिफारिश खारिज (लीड-2)
गोपालस्वामी 20 अप्रैल को अवकाश प्राप्त करने वाले हैं। इसके बाद चावला सबसे वरिष्ठ चुनाव आयुक्त होंगे, जो अप्रैल-मई में संभावित आम चुनाव को सम्पन्न करवाएंगे। चुनाव की घोषणा शीघ्र की जा सकती है।
सीईसी ने जनवरी में चावला को हटाने की सिफारिश राष्ट्रपति के पास भेजी थी। इससे संवैधानिक संस्था में मतभेद उजागर होने के साथ कांग्रेस नेतृत्व वाले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के बीच बयान युद्ध छिड़ गया था।
राष्ट्रपति भवन में तैनात विशेष अधिकारी अर्चना दत्ता ने कहा कि राष्ट्रपति ने चुनाव आयुक्त चावला को बर्खास्त करने की गोपालस्वामी की सिफारिश सहित विभिन्न पहलुओं पर 'गंभीरतापूर्वक विचार' करने के बाद यह फैसला लिया। मुख्य चुनाव आयुक्त ने चावला पर पक्षपात का आरोप लगाया था।
दत्ता ने आईएएनएस से कहा, "सीईसी की रिपोर्ट, सरकार के सुझावों, संवैधानिक प्रावधानों व सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों पर गंभीरतापूर्वक विचार करने के बाद राष्ट्रपति इस फैसले पर पहुंची और गोपालस्वामी की सिफारिश खारिज करने के सरकार के सुझाव को स्वीकार कर लिया।"
चावला को हटाने संबंधी विवाद मार्च 2006 से चला आ रहा है। उस वक्त भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी और 204 अन्य सांसदों ने चावला को हटाने के लिए तत्कालीन राष्ट्रपति ए. पी. जे. अब्दुल कलाम को ज्ञापन सौंपा था।
इस ज्ञापन को राष्ट्रपति कार्यालय ने कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकार के पास भेजा जिसे उसमें कोई दम नहीं दिखा।
इसके बाद भाजपा इस मुद्दे को सर्वोच्च न्यायालय तक ले गई लेकिन अदालत उसके तर्को से सहमत नहीं हुई और पार्टी ने अगस्त 2007 में याचिका वापस ले ली।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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