मध्य प्रदेश के बिजली संकट के लिए शिवराज सरकार की कार्यप्रणाली जिम्मेदार : दिग्विजय

केंद्र सरकार पर कोयला और बिजली आवंटन में भेदभाव बरतने के प्रदेश सरकार के आरोपों का दिग्विजय ने रविवार को संवाददाता सम्मेलन में खुलकर जवाब दिया। उन्होंने बिजली संकट के लिए पूरी तरह राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया और मुख्यमंत्री की न्याय यात्रा तथा प्रस्तावित दिल्ली के कोयला मार्च को महज नौटंकी करार दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में जब उनकी सरकार थी तब उसने बिजली की स्थिति में सुधार लाने के लिए कई कदम उठाए थे मगर वर्तमान सरकार उन प्रयासों को जारी रख पाने में पूरी तरह नाकाम रही है।

दिग्विजय सिंह ने बताया कि उनके शासन काल में मध्य प्रदेश विद्युत मंडल के स्थान पर पांच कंपनियां बनाई गई थीं जिनपर उत्पादन, वितरण और संधारण की जिम्मेदारी थी। साथ ही बिजली चोरी सहित अन्य गड़बडियों की जवाबदेही तय करने के लिए मीटर लगाने पर जोर दिया गया था जो अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। इस सरकार को पांच साल से अधिक का वक्त हो गया है। इस दरम्यान उसने न तो बिजली का उत्पादन बढाया है और न ही एक भी नए गांव का विद्युतीकरण किया गया है।

प्रदेश को पर्याप्त कोयला न मिलने के प्रदेश सरकार के आरोप को खारिज करते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा कि जनतांत्रिक गठबंधन सरकार के कार्यकाल से वर्तमान की केन्द्र सरकार ज्यादा कोयला आवंटित कर रही है। बिजली संकट की मूल वजह वितरण में होने वाली हानि, बिजली चोरी और उत्पादन में ज्यादा कोयले का खर्च होना है। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार पर कोल इंडिया का 300 करोड़ से अधिक का बकाया है।

दिग्विजय सिंह ने वर्तमान की राज्य सरकार को उद्योगपतियों की पक्षधर और किसान विरोधी बताते हुए खुलासा किया है कि उद्योगों को दी जाने वाली बिजली की दरों में जहां कटौती की गई है वहीं किसानों को दी जाने वाली बिजली में लगातार इजाफा हो रहा है। यही कारण है कि प्रदेश के दो लाख से अधिक किसानों ने अपने बिजली के कनेक्शन तक कटवा दिए है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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