काठमांडू में तिब्बती शरणार्थी गिरफ़्तार

इन लोगों को काठमांडू में चीनी दूतावास के निकट जाते हुए शक़ के आधार पर गिरफ़्तार किया गया था.
ग़ौरतलब है कि ये कदम तब उठाया गया है जब नेपाल में रह रहे तिब्बती शरणार्थी तिब्बत में विद्रोह की 50वीं वर्षगाँठ से पहले प्रदर्शन करने के प्रयास कर रहे हैं. ये वर्षगांठ 10 मार्च को है.
'प्रदर्शनों पर प्रतिबंध है'
काठमांडू के पुलिस प्रमुख ने बीबीसी को बताया कि शुक्रवार को 29 भिक्षुओं को संदिग्ध तरीके से घूमते हुए पाया गया और गिरफ़्तार कर लिया गया.
उनका कहना था कि ये लोग चीनी दूतावास और काउंसुलेट की इमारतों के पास घूम रहे थे और उस इलाक़े में प्रदर्शन करने पर प्रतिबंध है.
गुरुवार को युवा तिब्तियों ने कहा था कि उन्होंने इनमें से एक इमारत पर एक झंडा लगाया था और तब से प्रशासन में इन शरणार्थियों के लेकर चिंता थी.
नेपाल में माओवादियों की नई सरकार चीन के साथ गहरे कूटनीतिक रिश्ते जुटी है.
चीन का दबाव
हाल में चीन की ओर से सहायक विदेश मंत्री काठमांडू गए थे और उन्होंने वहाँ चीन विरोधी गतिविधियों पर रोक लगाने का आहवान किया था.
पिछले साल मार्च से लेकर छह महीने तक नेपाल में तिब्बतियों ने लगातार चीन विरोधी प्रदर्शन किए थे. उस समय प्रशासन ने सैकड़ों की संख्या में प्रदर्शनकारियों को गिरफ़्तार भी किया था.
वर्ष 1990 तक तिब्बती शरणार्थियों को नेपाल में बसने दिया जाता था. लेकिन उसके बाद चीन के दबाव के चलते उन्हें संयुक्त राष्ट्र के शरणार्थी शिविर में भेज दिया जाता है और फिर उन्हें भारत भेजा जाता है.


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