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बांग्लादेशः विद्रोह में मरनेवालों की तादाद 140 हुई

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बांग्लादेशः विद्रोह में मरनेवालों की तादाद 140 हुई

जनरल मोइन अहमद की ओर से यह विश्वास उन ख़बरों को ध्यान में रखते हुए जताया गया है जिनके मुताबिक कहा जा रहा है कि सेना में विद्रोह को रोकने के सरकार के तरीके को लेकर असंतोष पैदा हुआ है.

उधर बांग्लादेश में अर्धसैनिक बलों के बुधवार से शुरू हुए दो दिवसीय सशस्त्र विद्रोह के दौरान मारे गए लोगों की तादाद बढ़कर 140 हो गई है.

मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए बांग्लादेश सरकार ने देश में तीन दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है.

सेना का कहना है कि कम से कम 50 सैन्य अधिकारियों सहित कई अन्य लोगों का अभी भी पता नहीं चल सका है. 58 सैन्य अधिकारियों के शव तो एक सामूहिक क़ब्र में मिले हैं.

बुधवार को ढाका में शुरु हुआ बांग्लादेश राइफ़ल्स (बीडीआर) के जवानों का विद्रोह गुरुवार को प्रधानमंत्री शेख़ हसीना की चेतावनी और आत्मसमर्पण की अपील के बाद थम गया था.

बीडीआर के जवानों ने वेतन और काम करने के वातावरण के मुद्दों को लेकर सशस्त्र विद्रोह कर दिया था. वे ढाका में सेना के बैरकों में घुस आए थे और कई लोगों को बंधक बना लिया था.

शवों की तलाश

अधिकारियों का कहना है कि अब तक 70 सैन्य अधिकारियों के शव बरामद किए गए हैं. इन्हें या तो सामूहिक रुप से दफ़ना दिया गया था या फिर नालियों में डाल दिया गया था.

अधिकारी अभी भी और लापता लोगों की तलाश में लगे हुए हैं. मारे गए लोगों में बीडीआर के प्रमुख मेजर जनरल शकील अहमद भी शामिल हैं.

अब सरकार ने बीडीआर के नए प्रमुख की नियुक्ति की घोषणा कर दी है.

इस तरह भी निकाले गए शव

बांग्लादेश में अधिकारियों ने बताया कि शुक्रवार को सुरक्षा बलों ने विद्रोह करने वाले बांग्लादेश राइफ़ल्स के 300 जवानों को गिरफ़्तार किया था.

इन जवानों की गिरफ़्तारी के बारे में आधिकारिक तौर पर कहा गया है कि बांग्लादेश राइफ़ल्स के जवान ढाका में अपने मुख्यालय से आम नागरिकों की वेशभूषा में भाग रहे थे जब उन्हें गिरफ़्तार किया गया.

हत्यारों को माफी नहीं

सरकार ने स्पष्ट किया है कि विद्रोह करने वाले जिन लोगों को आममाफ़ी की घोषणा की गई थी वह उन लोगों पर लागू नहीं होगी जो हत्याओं में संलग्न थे.

सेना प्रमुख ने अपने बयान में कहा है कि जो लोग विद्रोह के दौरान हत्या करने में शामिल थे उनको सख़्त सज़ा दी जाएगी और जल्द सज़ा दी जाए, इसके लिए विशेष अदालत की व्यवस्था होगी.

प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा है कि सरकार इस बात की जाँच करवाएगी कि यह विद्रोह किस तरह शुरु हुआ और इसके पीछे कौन लोग थे.

उनका कहना था कि सरकार इसकी जाँच करवाएगी कि क्या विद्रोह पूर्व नियोजित था और जैसा कि कुछ लोग कह रहे हैं, किसी बड़े षडयंत्र का हिस्सा था. या फिर यह अचानक ही हो गया, जैसा कि विद्रोह में शामिल कुछ जवानों ने कहा है.

बीबीसी संवाददाता मार्क डमेट का कहना है कि विद्रोह चाहे पूर्व नियोजित रहा हो या अचानक ही हो गया हो, इसने देश की छवि को नुक़सान तो पहुँचाया ही है.

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