बांग्लादेश में तीन दिनों का शोक

बांग्लादेश सरकार ने अर्धसैनिक बलों के विद्रोह के दौरान मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए देश में तीन दिन के शोक की घोषणा की है.
बुधवार को शुरु हुए इस विद्रोह में लगभग 130 लोगों के मारे जाने की आशंका जताई गई है. इनमें से 70 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं. 58 सैन्य अधिकारियों के शव तो एक सामूहिक क़ब्र में मिले हैं.
सेना का कहना है कि कम से कम 50 सैन्य अधिकारियों सहित कई अन्य लोगों का अभी भी पता नहीं चल सका है. बुधवार को ढाका में शुरु हुआ बांग्लादेश राइफ़ल्स (बीडीआर) के जवानों का विद्रोह गुरुवार को प्रधानमंत्री शेख़ हसीना की चेतावनी और आत्मसमर्पण की अपील के बाद थम गया था.
इससे पहले ये विद्रोह ढाका के अलावा लगभग अनेक नगरों में फैल गया था.
बीडीआर के जवानों ने वेतन और काम करने के वातावरण के मुद्दों को लेकर सशस्त्र विद्रोह कर दिया था. वे ढाका में सेना के बैरकों में घुस आए थे और कई लोगों को बंधक बना लिया था.
शवों की तलाश
अधिकारियों का कहना है कि अब तक 70 सैन्य अधिकारियों के शव बरामद किए गए हैं. इन्हें या तो सामूहिक रुप से दफ़ना दिया गया था या फिर नालियों में डाल दिया गया था. अधिकारी अभी भी और लापता लोगों की तलाश में लगे हुए हैं.
मारे गए लोगों में बीडीआर के प्रमुख मेजर जनरल शकील अहमद भी शामिल हैं. अब सरकार ने बीडीआर के नए प्रमुख की नियुक्ति की घोषणा कर दी है.
इस तरह भी निकाले गए शव
इस बीच लापता लोगों के परिजनों ने ढाका में बीडीआर मुख्यालय के बाहर ख़बर के इंतज़ार में बेचैनी और नाराज़गी में दिन काटा. बांग्लादेश में अधिकारियों ने बताया है कि शुक्रवार को सुरक्षा बलों ने विद्रोह करने वाले बाग्लादेश राइफ़ल्स के 300 जवानों को गिरफ़्तार किया है.
इन जवानों की गिरफ़्तारी के बारे में आधिकारिक तौर पर कहा गया है कि बांग्लादेश राइफ़ल्स के जवान ढाका में अपने मुख्यालय से आम नागरिकों की वेशभूषा में भाग रहे थे जब उन्हें गिरफ़्तार किया गया.
जाँच
सरकार ने स्पष्ट किया है कि विद्रोह करने वाले जिन लोगों को आममाफ़ी की घोषणा की गई थी वह उन लोगों पर लागू नहीं होगी जो हत्याओं में संलग्न थे.
प्रधानमंत्री शेख ने कहा है कि सरकार इस बात की जाँच करवाएगी कि यह विद्रोह किस तरह शुरु हुआ और इसके पीछे कौन लोग थे. उनका कहना था कि सरकार इसकी जाँच करवाएगी कि क्या विद्रोह पूर्व नियोजित था और जैसा कि कुछ लोग कह रहे हैं, किसी बड़े षडयंत्र का हिस्सा था. या फिर यह अचानक ही हो गया, जैसा कि विद्रोह में शामिल कुछ जवानों ने कहा है.
बीबीसी संवाददाता मार्क डमेट का कहना है कि विद्रोह चाहे पूर्व नियोजित रहा हो या अचानक ही हो गया हो, इसने देश की छवि को नुक़सान तो पहुँचाया ही है.


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